महापौर के निर्देश पर नगर निगम ने राइट टाउन का भूखंड क्रमांक-51 लिया वापस, जनसुविधाओं का मेगा प्रोजेक्ट होगा तैयार
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की भूमि पर अब निगम का कब्जा,जनहित में शुरू हुआ स्वास्थ्य शाखा का वार्ड कार्यालय

जबलपुर, यश भारत। शहर के हृदय स्थल राइट टाउन में स्थित बेशकीमती भूखंड क्रमांक-51 अब आधिकारिक रूप से जबलपुर नगर निगम के आधिपत्य में आ गया है। यह कार्रवाई जगत बहादुर सिंह अन्नू के निर्देश पर पारदर्शी और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी कार्रवाई में राघवेंद्र सिंह और राम प्रकाश अहिरवार के स्तर पर निगरानी और समन्वय रहा। नगर निगम ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए भूखंड को सुरक्षित रूप से अपने अधीन ले लिया है।
नगर निगम प्रशासन के अनुसार वर्तमान में इस भूखंड पर निगम कार्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही इस भूमि का उपयोग पूरी तरह जनहित और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा। इसके लिए एक बड़े और उपयोगी मेगा प्रोजेक्ट की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं, ताकि भविष्य में यहां से शहर की जनता को सीधा लाभ मिल सके और निगम की आय में भी वृद्धि हो। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शहर के अन्य लीजधारकों द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो उनके विरुद्ध भी लीज निरस्त कर संपत्ति को वापस लेने की कार्रवाई की जाएगी।
आज जबलपुर के प्रतिष्ठित राइट टाउन क्षेत्र में स्थित दिवंगत डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करीब 25 हजार वर्गफुट लीज भूमि पर गुरुवार सुबह नगर निगम ने विधिवत कार्रवाई करते हुए कब्जा ले लिया। कार्रवाई नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार की मौजूदगी में की गई। निगम अमले ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और परिसर को अपने नियंत्रण में लेते हुए यहां स्वास्थ्य शाखा का वार्ड कार्यालय प्रारंभ कर दिया।
जांच में पाया गया कि लीज की शर्तों आयुक्त ने बताया कि संबंधित भूमि नगर निगम द्वारा आवासीय उपयोग के लिए लीज पर प्रदान की का उल्लंघन कर परिसर का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार यहां दुकानें संचालित की जा रही थीं, जो लीज अनुबंध और प्रशासनिक आदेशों के विपरीत था। साथ ही यह भी सामने आया कि लीज की वार्षिक किराया राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया और संपत्ति को हस्तांतरित न किए जाने की शर्त का भी पालन नहीं हुआ। नगर निगम द्वारा पूर्व में दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं, किंतु निर्धारित समय सीमा में किसी भी व्यक्ति या पक्ष ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर स्वामित्व का दावा नहीं किया। इसके बाद निगम प्रशासन ने नियमानुसार संपत्ति को पुनः अपने अधीन ले लिया।
निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब इस परिसर की संपूर्ण निगरानी नगर निगम करेगा और बिना अनुमति किसी भी प्रकार की गतिविधि या प्रवेश पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि संपत्ति का उपयोग जनहित में किया जाएगा तथा यहां से स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाएं संचालित कर क्षेत्रीय नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाया जाएगा।








