मकर संक्रांति पर नर्मदा तटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब,श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
घाटों पर पुख्ता इंतजाम

जबलपुर,यशभारत। मकर संक्रांति के अवसर पर पुण्य सलिला नर्मदा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। कड़ाके की ठंड के बावजूद, सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह-सुबह ही बड़ी संख्या में लोग नर्मदा स्नान के लिए गौरीघाट और तिलवाराघाट जैसे प्रमुख घाटों पर एकत्रित हुए। मकर संक्रांति के अवसर पर सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने ग्वारीघाट सहित नर्मदा के 6 प्रमुख घाटों पर नावों के संचालन को प्रतिबंधित कर दिया था, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से डुबकी लगा सकें।

दान-पुण्य: स्नान के बाद, श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, और अन्य आवश्यक सामग्रियों का दान किया, जो इस पावन पर्व पर विशेष फलदायी माना जाता है। इस पावन अवसर पर नर्मदा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है। मकर संक्रांति पर गुरुवार को शुभ मुहूर्त में श्रद्घालुओं ने नर्मदा तटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। गौरीघाट, तिलवाराघाट, भड़ाघाट, लम्हेटाघाट सहित अन्य घाटों में पहुंचकर हजारों श्रद्घालुओं ने पूजन-अर्चन कर खिचड़ी व अन्य वस्तुओं का दान किया। दूसरे दिन भी पुलिस व प्रशासन नर्मदा तटों पर चौकन्ना रहा।

पुलिस ने रात से ही मोर्चा संभाल लिया है.पुलिस का घाटों पर पुख्ता इंतजाम
जबलपुर पुलिस ने भिटोली, ग्वारीघाट, उमाघाट, खारी घाट, तिलवारा घाट, भेड़ाघाट, सरस्वती घाट जैसे सभी नर्मदा घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था का पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किया है. सुरक्षा शहर के भीतर पडऩे वाले गौरीघाट में रखी गई है क्योंकि यहां शहर के लोगों के अलावा आसपास के क्षेत्र के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और आने जाने का एक ही रास्ता है. इसलिए जाम की संभावना भी बन जाती है.
तिलवाराघाट पर मकर संक्रांति मेला शुरू
तिलवाराघाट पर मकर संक्रांति मेला आरम्भ हो गया है। यह मेला ऐतिहासिक व 1100 वर्ष पुराना है। संक्रांति पर इस घाट में तिल वारने (अर्पित करने) की परंपरा के चलते ही इस घाट का नाम तिलवाराघाट पड़ा था। नर्मदा के किनारे मकर संक्रांति पर्व भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। इसे देखते हुए नर्मदा के गौरीघाट, जिलहरीघाट, लम्हेटाघाट, भेड़ाघाट व तिलवाराघाट में तैयारियां जोरों पर है। नर्मदा के घाटों पर पहले से ही दुकानें लगने लगी हैं। तीर्थ पुरोहितों ने भी अनुष्ठान कराने की तैयारी कर ली है।
तिलवारा घाट का तिल भांडेश्वर मंदिर
तिलवारा घाट का नाम ही मकर संक्रांति में तिल के उपयोग से जुड़ा हुआ है. यहां ठीक नर्मदा किनारे तिल भांडेश्वर मंदिर है. संक्रांति पर सदियों से भगवान शिव की इस प्रतिमा पर भक्त तिल अर्पित करते हैं. तिलवारा के दोनों घाटों पर मकर संक्रांति पर मेला लगता है. जिस तरह ग्वारीघाट में शहर के लोग स्नान करने के लिए पहुंचते हैं वहीं तिलवारा घाट में जबलपुर, सिवनी, कटनी और दमोह के लोग नर्मदा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. हालांकि यह जगह हाईवे पर है इसलिए यहां जाम के हालात नहीं बनते.।
खिचड़ी का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और खाने की भी परंपरा है. लोग मकर संक्रांति के दिन अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार करते हैं. कहीं मूंग दाल की खिचड़ी, कहीं सिंपल खिचड़ी, कहीं सभी सब्जियों को मिलाकर खिचड़ी बनाते हैं. जितने क्षेत्र उतने तरह के स्वाद. इसीलिए मकर संक्रांति को खिचड़ी का पर्व भी माना जाता है. ये परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे लोग अनवरत निभाने जा रहे हैं







