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OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई: मध्यप्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ के आदेशों को लागू करने का दिया समर्थन, लेकिन फिर लिया यू-टर्न

नई दिल्ली/जबलपुर, —

OBC आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकरणों में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार के रुख में अचानक बदलाव देखने को मिला। छत्तीसगढ़ राज्य के आरक्षण मामलों में पारित आदेशों को मध्यप्रदेश में लागू करने का पहले समर्थन करने के बाद अब राज्य सरकार ने प्रकरणों को पृथक सुनवाई की मांग कर दी।

 

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस नरसिम्हा एवं जस्टिस ए.एस. चादुरकर शामिल थे, ने मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के OBC आरक्षण संबंधी प्रकरणों की सुनवाई की। मध्यप्रदेश सरकार के ट्रांसफर किए गए मामलों — TC (C) NO. 07/2025, WP (C) NO. 606/2025 सहित कुल 9 याचिकाएं — छत्तीसगढ़ की SLP (Civil) No. 18816-18817/2022 से लिंक की गई थीं।

 

🔹 मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कानूनों में फर्क

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि छत्तीसगढ़ के 27% OBC आरक्षण कानून को वहां के हाईकोर्ट ने निरस्त किया है, जबकि मध्यप्रदेश में ऐसा कोई आदेश नहीं है — न ही हाईकोर्ट ने कानून को खारिज किया है और न ही स्टे दिया गया है।

 

🔹 27% आरक्षण के बावजूद 13% पद होल्ड!

 

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट में कहा कि यदि कानून पर रोक नहीं है तो सरकार 27% OBC आरक्षण वाले विज्ञापन क्यों प्रकाशित कर रही है, और फिर भी भर्ती में 13% पदों को होल्ड क्यों कर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के महाधिवक्ता के अभिमत के कारण ही 27% आरक्षण अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है।

 

🔹 सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तय की

 

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश के मामलों की अगली सुनवाई अगले सप्ताह पृथक से की जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या ये मामले छत्तीसगढ़ से वास्तव में अलग हैं या नहीं। यदि समानता पाई गई, तो छत्तीसगढ़ में दिए गए अंतरिम आदेश मध्यप्रदेश में भी लागू हो सकते हैं।

 

🔹 राज्य सरकार ने पहले किया विरोध

 

दिलचस्प यह रहा कि सुप्रीम कोर्ट शुरू में इन मामलों को हाईकोर्ट वापस भेजना चाहती थी, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद सुनवाई जारी रखी।

🔹 याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए ये वकील

प्रकरण में याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता वरुण ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और AOR संदीप सेन ने पक्ष रखा।

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