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आज से  नए क्रिमिनल लॉ लागू,अपराध की परिभाषा बदली: अवैध शारीरिक संबंध अपराध, गैंगरेप की सजा मौत

New criminal law: नई दिल्ली, एजेंसी। देश में आज से & नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। आज तक देश में भारतीय संविधान के तहत मान्यता प्राप्त भारतीय दंड संहिता , दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872) कानून लागू थे। किसी भी तरह के अपराध के लिए इनके तहत किए गए सजा के प्रावधान लागू होते थे। आज से इन तीनों कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता , भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हो गए हैं। इनके लागू होते ही कुछ अपराधों की परिभाषाएं और उनके लिए सजा के प्रावधान भी बदल गए हैं। आइए जानते हैं कि आज 1 जुलाई से देश मे कानून व्यवस्था में क्या-क्या बदल गया और अब किस अपराध के लिए कितनी सजा होगी?

New criminal law
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 धाराएं घटाई गईं, नए अपराध जोड़े गए

भारतीय न्याय संहिता (क्चहृस्) में ढ्ढक्कष्ट की धाराएं 511 से घटाकर &58 धाराएं रह गई हैं। क्चहृस् में 21 नए अपराध जोड़े गए हैं। 41 अपराधों में कारावास की अवधि बढ़ाई गई। 82 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया। 25 अपराधों में न्यूनतम सजा की शुरुआत की गई है। 6 अपराधों में सजा स्वरूप सामुदायिक सेवा की शुरुआत की गई है और 19 धाराएं हटा दी गईं है।

 कानून में यह सब बदलाव हुए

New criminal law:  में 484 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (क्चहृस्स्) में 5&1 धाराएं हैं, जिनमें से 177 धाराओं में बदलाव किया गया है। 9 धाराएं और &9 उपधाराएं और जोड़ी गई हैं। 14 धाराएं हटाई गई हैं। 166 धाराओं वाले भारतीय साक्ष्य अधिनियम को 170 धाराओं वाले भारतीय साक्ष्य अधिनियम (क्चस््र) से बदला गया है। इसमें 24 धाराओं में बदलाव हुआ है। 2 नई उप-धाराएं शामिल की गई हैं। 6 धाराओं को हटा दिया गया है।

पीडि़ता महिलाओं के बयान दर्ज करने से जुड़े नए नियम
तीनों नए कानूनों के तहत अपराध पीडि़त महिलाओं के बयान दर्ज करने को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। दुष्कर्म पीडि़ता के बयान अब उसके परिजनों या रिश्तेदार के सामने दर्ज किए जाएंगे। बयान महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज कराएगी। महिलाओं के खिलाफ हुए कुछ अपराधों में पीडि़ता के बयान महिला मजिस्ट्रेट ही दर्ज करेगी। अगर महिला मजिस्ट्रेट न हो तो पुरुष मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करा सकेगा, लेकिन उस समय किसी महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। दुष्कर्म पीडि़ता के बयान ऑडियो-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी दर्ज किए जा सकेंगे।

दुष्कर्म या धोखा पीडि़तों को लेकर भी बदले कानून

नए कानूनों के तहत दुष्कर्म पीडि़त की मेडिकल रिपोर्ट 7 दिन के अंदर जमा करानी होगी। पीडि़त महिला को निशुल्क उपचार कराने का अधिकार मिल गया है।अवहीं पीडि़ता को 90 दिन के अंदर उसके केस का अपडेट देना होगा। अब महिला को शादी करने का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना और फिर शादी करने से मुकर जाना अपराध होगा। ऐसा करने वाले को 10 साल की सजा हो सकती है। नौकरी और अपनी पहचान छिपाकर शादी करना अपराध होगा। शादीशुदा महिला को प्रेम जाल में फंसाना अपराध होगा, लेकिन अब अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध नहीं होगा।

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कानून के दायरे में आए ट्रांसजेंडर

& नए कानून लागू होने के बाद लिंग की परिभाषा में अब ट्रांसजेंडर लोग भी शामिल हो गए हैं। इससे अपराध के क्षेत्र में कानून के तहत भी सभी को समानता का अधिकार मिल गया है। अब ट्रांजेंडर्स को भी इंसाफ मिलेगा।

ब’चों और नाबालिगों के लिए भी बदले नियम

नए कानूनों के तहत ब’चों के खिलाफ अपराध की परिभाषा भी बदल है। नए नियम काफी कड़े बनाए गए हैं। जैसे अब ब’चों की खरीद फरोख्त जघन्य अपराध होगी। ब’चों को खरीदने या बेचने को जघन्य अपराध मानकर कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। नाबालिग ब’िचयों-लड़कियों से दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म करने पर मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है। कुछ मामलों में उम्रकैद की सजा भी हो सकती है।

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हत्या-रेप की धाराएं बदलीं, मॉब लिंचिंग पर मौत

नए कानूनों के तहत, हत्या और रेप करने की धाराएं बदल गई हैं। अब हत्या करने पर धारा &02 नहीं लगेगी, बल्कि 101 लगाई जाएगी। धोखाधड़ी के लिए धारा 420 नहीं लगेगी, बल्कि &18 लगाई जाएगी। दुष्कर्म करने पर धारा &75 नहीं लगेगी, बल्कि 6& लगाए जाएगी। नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग के आधार पर भेदभाव करते हुए मॉब लिंचिंग करना, भीड़ बनकर किसी को पीट-पीट कर मार डालना अपराध होगा। ऐसा करने पर मौत की सजा हो सकती है। उम्रकैद की सजा भी सुनाई जा सकती है। छीना-झपटी करने पर & साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

घर बैठे स्नढ्ढक्र कराएं, सुनवाई 45 दिन के अंदर
नए कानूनों के तहत, पीडि़त अब घर बैठे श्व-स्नढ्ढक्र दर्ज करा सकेंगे। पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी थाने में जीरो स्नढ्ढक्र दर्ज कराई जा सकेगी। चाहे जो अपराध हुआ है, वह उस थाने में अधिकार क्षेत्र में आता हो या नहीं। क्रिमिनल केस की सुनवाई अब 45 दिन के अंदर करनी अनिवार्य होगी। वहीं पहली सुनवाई होने के बाद 60 दिन के अंदर चार्जशीट दायर करनी होगी।

भोपाल के हनुमानगंज थाने में दर्ज हुई पहली एफआईआर
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हनुमानगंज थाने में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की गई। जानकारी के अनुसार धारा 17& के तहत गाली गलौज की धारा में दर्ज की गई हैं। इसमें फरियादी इसरानी मार्केट थाना हनुमानगंज निवासी 40 वर्षीय प्रफुल्ल चौहान पिता जय नारायण चौहान की शिकायत पर राजा उर्फ हरभजन पर दर्ज की गई है। जिसका घटनास्थल सामातंर रोड कट प्वाइंट है। घटना एक जुलाई रात 12 बजकर 5 मिनट की है। आरोपित राजा ने प्रफुल्ल को गालियां दी थीं।

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