भोपालमध्य प्रदेश

भारत को जाने भारत को माने, भारत के बने और फिर भारत को बनाएं

भारत को जाने भारत को माने, भारत के बने और फिर भारत को बनाएं
– आठ वर्षों के अनुभव का संग्रह है हम और यह विश्व – पूर्व उपराष्ट्रपति
यशभारत भोपाल। सुरुचि प्रकाशन की ओर से रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक हम और यह विश्व का विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत की मूल अवधारणा, आत्मगौरव, सांस्कृतिक चेतना और अध्ययनशील परंपरा पर व्यापक चर्चा हुई। इस अवसर पर श्री आनंदम धाम आश्रम, वृंदावन के पीठाधीश्वर ऋतेश्वर महाराज, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आदि उपस्थित रहे। पुस्तक के लेखक डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारतीयता, अध्ययन और विमर्श की आवश्यकता पर अपना उद्बोधन दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत को बनाने से पहले आवश्यक है कि हम पहले भारत को माने, उसके बाद भारत को जाने, फिर भारत के बने और उसके बाद भारत को बनाएं। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत उस अनुभव से की जिसने उन्हें लेखन की ओर प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि संघ पर बेवजह किया गया विरोध कई बार संघ की स्वीकार्यता को और बढ़ा देता है। जॉइन आरएसएस वेबसाइट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सिर्फ उस वर्ष अक्टूबर माह में ही 48,890 लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में जुडऩे का अनुरोध किया। यह भारत के सामाजिक परिवर्तन और संगठन के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।

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