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भोपाल के जवाहर उद्यान के अनमोल आम: विदेशों में भारी मांग, मियाजाकी बना आकर्षण का केंद्र

भोपाल

राजधानी भोपाल के भेल क्षेत्र में अवस्थित जवाहर उद्यान, अपने अद्वितीय और स्वादिष्ट आमों की विविधता के कारण न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। इस उद्यान में उगने वाले हापुस, कृष्णभोग, जाफरान कोहिनूर, महाराजा, दय्यड़, तोतापरी, लंगड़ा, मल्लिका और आम्रपाली जैसी उत्कृष्ट किस्मों के आमों की बाजार में अत्यधिक मांग रहती है। भोपाल के इस बाग से प्राप्त आमों को लोग दूर देशों में बसे अपने प्रियजनों तक भी पहुंचाते हैं। इस वर्ष, इस उद्यान में जापान का विश्वप्रसिद्ध और बहुमूल्य आम, मियाजाकी भी उपलब्ध है, जिसके यहां चार वृक्ष शोभायमान हैं।

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दुनिया का सबसे महंगा आम, भोपाल में किफायती दाम

मियाजाकी आम को वैश्विक स्तर पर सबसे महंगा आम माना जाता है, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमत लगभग ₹2.5 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। हालांकि, भोपाल के जवाहर उद्यान में यह दुर्लभ आम ग्राहकों को अपेक्षाकृत किफायती दर, ₹1200 प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध है।

अद्वितीय स्वाद, सुगंध और रेशे रहित गूदाbhopalmangohighestpriceininternationalmarket 20052025140537 2005f 1747730137 1048

मियाजाकी आम अपनी अनुपम सुंदरता के लिए जाना जाता है, जिसका गहरा रूबी लाल रंग इसे “सूर्य का अंडा” (Egg of the Sun) की संज्ञा दिलाता है। रंग के अतिरिक्त, यह आम अपने उत्कृष्ट स्वाद और मनमोहक सुगंध के लिए भी विख्यात है। इसमें मिठास की प्रचुरता होती है और शर्करा की मात्रा भी उल्लेखनीय रूप से पाई जाती है। लगभग 350 से 550 ग्राम तक वजन वाला यह आम रेशे रहित गूदे और विशिष्ट खुशबू के कारण अन्य आमों से अलग पहचान रखता है।

मियाजाकी की खेती: विशेष देखभाल और समर्पण

जवाहर उद्यान, जो कि भेल प्रबंधन के अधीन है, प्रतिवर्ष ठेके पर दिया जाता है। विगत कुछ वर्षों से इसका प्रबंधन अली द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने चार वर्ष पूर्व जवाहर बाग में मियाजाकी आम का पौधा रोपित किया था, जो अब फल देने लगा है। अली बताते हैं कि इस नाजुक पौधे को प्रारंभिक अवस्था में पॉली हाउस में संरक्षित किया जाता है। इसकी रोपाई के लिए दो वर्ष पूर्व गड्ढा तैयार किया जाता है, जिसमें दो वर्षों तक आवश्यक नमी बनाए रखी जाती है।

प्रत्येक माह पौधे को 100 ग्राम गोबर की खाद, 50 ग्राम पिसी हुई अजवाइन, 50 ग्राम हल्दी या नीम की छाल, अथवा अमोनियम सल्फेट मिलाकर डाला जाता है। दो वर्ष पश्चात, जब पौधे का तना मजबूत हो जाता है, तो उसे गड्ढे में स्थापित कर दिया जाता है। इसके बाद, हर 15 से 20 दिनों में गोबर की खाद या नमी बनाए रखने के लिए अमोनियम सल्फेट का प्रयोग किया जाता है।

‘पीटर इंग्लैंड’: जवाहर बाग की एक नई उत्कृष्ट किस्मbhopalmangohighestpriceininternationalmarket 20052025140537 2005f 1747730137 308

जवाहर बाग के समर्पित केयर टेकर, शमी अली, बताते हैं कि यह उद्यान लगभग 50 एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां 20 विभिन्न प्रजातियों के 2000 से अधिक आम के वृक्ष मौजूद हैं। यह भोपाल जिले का सबसे बड़ा आम का बगीचा है, जो आमों की इतनी व्यापक विविधता का घर है। अली ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने जवाहर बाग में कई नवीन और उत्कृष्ट किस्मों के आम भी विकसित किए हैं। इनमें से एक है ‘पीटर इंग्लैंड’, जो देखने में जितना आकर्षक है, स्वाद में उतना ही लाजवाब है। अली ने चार विशिष्ट आम की किस्मों के संयोजन से इस नई प्रजाति को तैयार किया है, जिसकी बाजार में कीमत ₹1000 से ₹1200 के बीच है।

जवाहर बाग के अन्य अनमोल रत्न

भेल क्षेत्र में स्थित यह आम का बाग, जहां आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों और फलों की खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग आम बात है, पूरी तरह से रसायन मुक्त है। यहां आम पेड़ों पर स्वाभाविक रूप से पकने के बाद ही तोड़े जाते हैं, और कई ग्राहक तो अपनी आंखों के सामने आम तुड़वाकर भी ले जाते हैं। केयर टेकर अली ने बताया कि इस बाग में लंगड़ा, दशहरी, चौसा, नरगिस, आम्रपाली, कृष्णभोग, जाफरान कोहिनूर, डालर, महाराजा, दय्यड़, हिमसागर, मलका, कैंसर जैसी कई अन्य उत्कृष्ट किस्में भी उपलब्ध हैं।

यहां नूरजहां आम भी पाया जाता है, जो अपनी अद्वितीय मिठास के बजाय असाधारण आकार और वजन के लिए प्रसिद्ध है। इसके एक फल का वजन चार किलोग्राम तक हो सकता है और बाजार में इसकी अत्यधिक मांग रहती है। जवाहर बाग में नूरजहां के 150 से अधिक वृक्ष हैं। इसके अतिरिक्त, दुर्लभ प्रजाति के मल्लिका और आम्रपाली आम भी इस उद्यान की शोभा में चार चांद लगाते हैं।

पाकिस्तान और चीन को आम भेजने से इनकारbhopalmangohighestpriceininternationalmarket 20052025140537 2005f 1747730137 1048

शमी अली ने बताया कि जवाहर बाग के उच्च गुणवत्ता वाले आमों की पहुंच विदेशों तक है। यहां से लोग पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका, तुर्की, अजरबैजान और इंग्लैंड सहित विभिन्न देशों में अपने संबंधियों को आम भेजते हैं। हालांकि, वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के कारण, अली ने यह निर्णय लिया है कि वह पाकिस्तान का समर्थन करने वाले देशों को अपने आम नहीं भेजेंगे। अब यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान, तुर्की, अजरबैजान और चीन में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के लिए आम खरीदने आता है, तो अली उन्हें आम बेचने से स्पष्ट इनकार कर देते हैं।

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