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9 करोड़ की टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा, जबलपुर EOW की कार्रवाई 

बस मालिक और परिवहन कर्मचारी पर FIR दर्ज

9 करोड़ की टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा, जबलपुर EOW की कार्रवाई 

बस मालिक और परिवहन कर्मचारी पर FIR दर्ज

जबलपुर, यश भारत। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, जबलपुर (EOW) ने लगभग 9 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बस मालिक दंपत्ति और परिवहन विभाग के एक कर्मचारी के विरुद्ध अपराध दर्ज किया है। मामला वर्ष 2006 से 16 फरवरी 2026 के बीच का बताया जा रहा है।आरोपियों के विरुद्ध धारा 318(4), 61(2), 238 (सी) बीएनएस 2023 एवं धारा 7सी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

कौन हैं आरोपी?

संजय केशवानी, निवासी नर्मदागंज, डिण्डौरी (वाहन स्वामी)

साधना केशवानी, निवासी नर्मदागंज, डिण्डौरी (वाहन स्वामी)

पुष्प कुमार प्रधान, सहायक ग्रेड-1, जिला परिवहन कार्यालय डिण्डौरी (हाल निवास नरसिंहपुर)

क्या है पूरा मामला?

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल से प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई थी। शिकायत में आरोप था कि बकाया टैक्स होने के बावजूद संबंधित बसों का परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र जिला परिवहन कार्यालय डिण्डौरी से जारी किया गया जांच में सामने आया कि संजय और साधना केशवानी के नाम पर 16 यात्री बसें डिण्डौरी, जबलपुर, शहडोल, मण्डला और बालाघाट में पंजीकृत थीं।ये बसें डिण्डौरी–जबलपुर, डिण्डौरी–बम्हनी, बिछिया–डिण्डौरी और अमरकंटक–मलाजखंड रूट पर संचालित की जा रही थीं।

2006 से टैक्स जमा नहीं, कबाड़ घोषित कर बचते रहे

जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2006 से 2025 तक इन बसों का टैक्स जमा नहीं किया गया। वाहन मालिकों ने परिवहन कार्यालय में बसों को कबाड़ में बेचने की सूचना देकर टैक्स भुगतान बंद कर दिया।वर्ष 2017 में जब जिला परिवहन कार्यालय डिण्डौरी ने टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की, तब सहायक ग्रेड-1 पुष्प कुमार प्रधान द्वारा इन बसों से संबंधित टैक्स फाइलें गायब कर दी गईं।फाइलों के गायब होने के कारण विभाग टैक्स वसूल नहीं कर सका, जिससे शासन को लगभग 9 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

आपराधिक षड्यंत्र और पद का दुरुपयोग

EOW की जांच में पाया गया कि बस मालिकों और परिवहन कर्मचारी ने आपसी सांठगांठ कर शासन के साथ धोखाधड़ी की।बिना अनुमति विवादित वाहनों को नष्ट किया गया।बकाया टैक्स की मूल नस्तियां सुरक्षित नहीं रखी गईं।पद का दुरुपयोग कर आरोपियों को लाभ पहुंचाया गया।प्रकरण में अपराध पंजीबद्ध कर विस्तृत विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।

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