खितौला बैंक डकैती पर अंदरूनी खींचतान
थानों का बल हतोत्साहित, क्राइम ब्रांच ने लूटी वाहवाही

जबलपुर, यश भारत। खितौला बैंक डकैती का खुलासा भले ही पुलिस ने अपनी उपलब्धि के रूप में गिनाया हो, लेकिन अंदरूनी हालात कुछ और ही तस्वीर दिखा रहे हैं। गिरफ्तारी और 3 किलो सोना बरामदगी के बावजूद जिले के कई थानों का बल हतोत्साहित नज़र आ रहा है। वजह है – पूरे ऑपरेशन का श्रेय क्राइम ब्रांच को दिलवाना, जबकि आरोपियों की तलाश और सुराग जुटाने में स्थानीय थानों का भी अहम योगदान रहा।
असंतोष की वजह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्राइम ब्रांच को “हीरो” की तरह पेश किया गया।थानों के पुलिस बल ने आरोपियों के ठिकाने तक पहुंचने और सुराग जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पुलिस विभाग के सूत्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई दरअसल एसटीएफ बिहार ने अंजाम दी, मगर जबलपुर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने का काम किया।
पहले ही पकड़ में आ सकते थे आरोपी
सूत्रों के अनुसार, इंद्राना में पुलिस टीम ने रहीस और सोनू बर्मन को ट्रेस कर लिया था। लेकिन तभी क्राइम ब्रांच टीम ने मौके पर पहुंचकर फोटो दिखाकर पड़ताल शुरू कर दी, जिससे आरोपी सतर्क हो गए और वहां से भाग निकले।बाद में रहीस, सोनू बर्मन और दो अन्य को अलग-अलग जगह से गिरफ्तार किया गया।पहले पकड़े गए रहीस से मात्र 1.83 लाख रुपये बरामद हुए।अब बिहार के गया से राजेश दास और उसके साथी की गिरफ्तारी हुई और 3 किलो सोना बरामद किया गया।
आगे की कार्यवाही पर असर
क्राइम ब्रांच की “श्रेय हथियाने” की कार्यप्रणाली से स्थानीय थाना प्रभारी और बल नाराज़ बताए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इससे आगे की जांच और कार्रवाई प्रभावित हो सकती है, क्योंकि थानों का मनोबल गिरा हुआ है।कुल मिलाकर, खितौला बैंक डकैती का खुलासा जितना उपलब्धि का मामला बताया जा रहा है, उतना ही यह पुलिस महकमे की अंदरूनी राजनीति और तालमेल की कमी को भी उजागर कर रहा है।







