भोपालमध्य प्रदेश

संसद में मुझे बोलने नहीं दिया गया, पीएम ने देश के हितों को बेचा: राहुल गांधी

संसद में मुझे बोलने नहीं दिया गया, पीएम ने देश के हितों को बेचा: राहुल गांधी

भोपाल,यशभारत। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसद में उनकी आवाज को दबाया गया और जब उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा व किसानों से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो उन्हें बोलने से रोक दिया गया।
इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष की आवाज दबाई गई

राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि विपक्ष के नेता को सदन में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया, मैं संसद में सच्चाई बयां करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने अमित शाह की तरफ देखा और शाह खड़े हो गए। मुझे बोलने नहीं दिया गया। जब मैं संदर्भ के लिए किताब लाया, तो कहा गया कि आप किताब नहीं दिखा सकते।
चीनी घुसपैठ और जनरल नरवणे की किताब का हवाला

राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आगामी किताब का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा जब चीनी टैंक भारतीय सीमा के अंदर आ रहे थे, तब सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को फोन किया, लेकिन किसी ने आदेश नहीं दिया। राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री से कह दिया कि आर्मी चीफ जो उचित समझें वही करें। राहुल के अनुसार, युद्ध का फैसला सेना नहीं, पीएम को लेना होता है, लेकिन उस वक्त पीएम पीछे हट गए थे।

बिना कैबिनेट पूछे ट्रंप को किया फोन
कृषि समझौते पर बड़ा खुलासा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सोया, कपास और भुट्टे को लेकर समझौता चार महीने से रुका हुआ था क्योंकि भारतीय किसान इसके खिलाफ थे। राहुल ने दावा किया, मेरे भाषण के तुरंत बाद पीएम ने बिना कैबिनेट से पूछे तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप को फोन किया और डील साइन करने की सहमति दे दी। ट्रंप ने खुद ट्वीट कर इसकी पुष्टि की थी।

मंच पर हल भेंट कर हुआ स्वागत
इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। नेताओं ने राहुल गांधी को ‘हल’ भेंट किया, जो किसानों के मुद्दों पर उनके कड़े रुख और संघर्ष का प्रतीक माना जा रहा है।

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