यद् भावं तद् भवति” के मंत्र के साथ जबलपुर में भावनायोग का ऐतिहासिक आयोजन
मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में 20 हजार लोगों ने लिया सकारात्मक जीवन का संकल्प

जबलपुर यशभारत। मानव जीवन को तनाव, नकारात्मकता और मानसिक अशांति से मुक्त कर सकारात्मक दिशा देने वाले भावनायोग का भव्य और ऐतिहासिक एकदिवसीय आयोजन आज रविवार को संस्कारधानी जबलपुर में संपन्न हुआ। पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में आयोजित इस विराट कार्यक्रम में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी के पावन सान्निध्य में लगभग 20 हजार की संख्या में नागरिकों ने सहभागिता कर भावनायोग का प्रत्यक्ष अनुभव किया और इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत आध्यात्मिक वातावरण और अनुशासन के साथ हुई, जहाँ “यद् भावं तद् भवति” के मंत्र ने पूरे परिसर को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। हर आयु वर्ग के लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज के तनावग्रस्त समाज में भावनायोग जैसी जीवनशैली की आवश्यकता कितनी गहरी है।इस गरिमामयी अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के ग्रामीण एवं पंचायत विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, उत्तर मध्य विधानसभा विधायक अभिलाष पांडे, कैंट विधायक अशोक रोहाणी, महापौर जगत बहादुर सिंह अनु, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू बिज, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे, वरिष्ठ भाजपा नेता सुधांशु गुप्ता, पूर्व विधायक विनय सक्सेना सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का आयोजन जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) एवं जबलपुर दिगम्बर जैन युवा महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसने आयोजन को सुव्यवस्थित और प्रभावी स्वरूप प्रदान किया।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने भावनायोग की गहन व्याख्या करते हुए कहा कि “मनुष्य का जीवन उसकी भावनाओं से संचालित होता है। जैसी भावना होती है, वैसा ही चिंतन, व्यवहार और परिणाम होता है।”

उन्होंने कहा कि सकारात्मक भावनाएँ मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं, जबकि नकारात्मक भावनाएँ तन, मन और मस्तिष्क—तीनों को रोगग्रस्त बनाती हैं।
मुनि श्री ने बताया कि भावनायोग के नियमित अभ्यास से क्रोध करुणा में, उत्तेजना शांति में और घृणा प्रेम में परिवर्तित हो जाती है। जब व्यक्ति बार-बार अच्छे विचारों और शुभ भावनाओं का अभ्यास करता है, तो मस्तिष्क में नई ऊर्जा का विकास होता है, जिससे इम्युनिटी बढ़ती है और शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक सुधार आता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज चिकित्सा विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि मनुष्य की लगभग 70 प्रतिशत बीमारियाँ भावनात्मक असंतुलन से उत्पन्न होती हैं। पहले मन बीमार होता है, फिर शरीर। भावनायोग इस असंतुलन को ठीक कर जीवन में स्थिरता और संतुलन लाने का सशक्त माध्यम है।
मुनि श्री ने आधुनिक मनोविज्ञान और भारतीय दर्शन का संबंध बताते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में जिसे लॉ ऑफ अट्रैक्शन कहा जाता है, उसका मूल हमारे प्राचीन भारतीय ग्रंथों में हजारों वर्ष पहले ही स्पष्ट रूप से बताया गया है—“यद् भावं तद् भवति।”
उन्होंने बताया कि भावनायोग जैन मुनियों की आचार्य परंपरा पर आधारित है, जिसके चार प्रमुख अंग हैं—प्रार्थना, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और सामायिक। यदि कोई सामान्य व्यक्ति प्रतिदिन केवल पाँच मिनट भी भावनायोग करे, तो उसके जीवन में कई गुना सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि “आज के समय और परिस्थितियों में हमारी आने वाली पीढ़ी को भ्रमजाल से बाहर निकालने का सबसे सहज और प्रभावी उपाय भावनायोग है।”

उन्होंने कहा कि मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में उन्हें शांति और आत्मिक विश्वास की अनुभूति होती है तथा वे स्वयं भी अपने जीवन में भावनायोग का पालन करते हैं।कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने जबलपुर की जनता का अभिनंदन करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ भावनायोग का अभ्यास करना और इसे जीवन में अपनाने का संकल्प लेना समाज के लिए अत्यंत शुभ और सकारात्मक संकेत है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का सशक्त उदाहरण बना, बल्कि जबलपुर को भावनात्मक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिला गया।







