सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर
स्टाइपेंड संशोधन और बकाया एरियर की मांग को लेकर मोर्चा; प्रदेशभर में 70% स्वास्थ्य कार्यभार प्रभावित
भोपाल, यश भारत। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार सुबह से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहरा गया है। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर सुबह 9 बजे से ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया गया, जिससे प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
क्या है मुख्य विवाद?
जेडीए के प्रतिनिधियों के अनुसार, शासन के 7 जून 2021 के आदेशानुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन आदेश के बावजूद अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड की प्रक्रिया शुरू की गई है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार निवेदन के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे नाराज होकर उन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
मरीजों पर सीधा असर: सामान्य ऑपरेशन टले
मेडिकल कॉलेजों की रीढ़ माने जाने वाले जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल का सीधा असर रूटीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। नए मरीजों के परामर्श और जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। जेडीए ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन थिएटर में केवल अति गंभीर मरीजों की ही सर्जरी की जाएगी। हर्निया, रॉड इंप्लांट और अन्य सामान्य ऑपरेशन अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। चूंकि अस्पताल का 70% भार रेजिडेंट डॉक्टर उठाते हैं, इसलिए भर्ती मरीजों की नियमित निगरानी में भी दिक्कतें आ रही हैं।
काली पट्टी से शुरू हुआ था विरोध
हड़ताल पर जाने से पहले डॉक्टरों ने पिछले तीन दिनों तक काली पट्टी बांधकर काम किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताया। जेडीए के डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को पहले ही ज्ञापन सौंप दिया गया था। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है, बल्कि शासन को उनके अपने ही आदेश की याद दिलाना है।
इमरजेंसी सेवाएं जारी
राहत की बात यह है कि जूनियर डॉक्टरों ने मानवीय आधार पर आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से मुक्त रखा है। कैजुअलिटी और आईसीयू में गंभीर मरीजों का इलाज पहले की तरह जारी रहेगा।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि जब तक स्टाइपेंड वृद्धि और एरियर भुगतान के लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।







