जीएसटी फर्जी ITC घोटाला: ₹512 करोड़ के जाली बिलों का खुलासा, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
GST fake ITC scam: Fake bills worth ₹512 crore unearthed, main accused arrested

जीएसटी फर्जी ITC घोटाला: ₹512 करोड़ के जाली बिलों का खुलासा, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
जबलपुर, यश भारत।30 जून, 2025 – आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े जीएसटी अपवंचन मामले का खुलासा किया है, जिसमें अब तक ₹512 करोड़ के फर्जी बिलों का पता चला है और ₹130 करोड़ की जीएसटी चोरी सामने आई है। इस मामले के मुख्य आरोपी विनोद सहाय उर्फ एन.के. खरे को रांची (झारखंड) से गिरफ्तार कर लिया गया है। EOW की जांच अभी भी जारी है।
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मुख्य आरोपी और उसकी कार्यप्रणाली
मुख्य आरोपी विनोद सहाय, जो मूलतः जबलपुर (म.प्र.) के ग्राम टिबरी का निवासी है, को EOW द्वारा पंजीकृत अपराध क्रमांक 102/25 के तहत रांची से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि विनोद सहाय वर्ष 2009 से फर्जी आईडी और नकली नामों जैसे ‘नीलू सोनकर’ और ‘एन.के. खरे’ का उपयोग करके विभिन्न फर्जी फर्मों और शेल कंपनियों के माध्यम से आर्थिक अपराधों में सक्रिय था।
फर्जी कंपनियों का जाल और बोगस इनवॉयसिंग
विनोद सहाय द्वारा नियंत्रित और संचालित फर्जी कंपनियों के नेटवर्क ने अब तक लगभग ₹512 करोड़ की बोगस इनवॉयसिंग को अंजाम दिया है। यह इनवॉयसिंग किसी भी वास्तविक वस्तु या सेवा के क्रय-विक्रय पर आधारित नहीं थी, बल्कि यह केवल कागजों पर दिखाया गया फर्जी व्यापार (Bogus Supply) था।
इस फर्जीवाड़े का मुख्य उद्देश्य था:
खरीदार कंपनियों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (Fake ITC) का लाभ देना।
जीएसटी का अपवंचन करना।
फर्जी दस्तावेजों, डमी प्रोपराइटर और डिजिटल पहचान का उपयोग कर मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आर्थिक आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देना।
जांच में पाया गया कि इन ₹512 करोड़ की इनवॉयस वैल्यू का कोई भौतिक स्टॉक, गोदाम, माल ढुलाई, परिवहन दस्तावेज या बैंकिंग आधार नहीं था। इस नेटवर्क में प्रयुक्त कंपनियों में से कुछ प्रमुख नाम हैं: नर्मदा ट्रेडर्स, नमामि ट्रेडर्स, अभिजीत ट्रेडर्स, मां रेवा ट्रेडर्स, अंकिता स्टील एंड कोल, जगदम्बा कोल कैरियर्स, महक इंटरप्राइजेज, के.डी. सेल्स कॉर्पोरेशन, कोराज टेक्निक, महामाया ट्रेडर्स इत्यादि। इन सभी कंपनियों का संचालन या तो विनोद सहाय स्वयं करता था, या फिर उसने अन्य नामों के माध्यम से अपना नेटवर्क फैला रखा था।
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जीएसटी पोर्टल पर इन कंपनियों से कर योग्य आपूर्ति (Outward Supply) के रूप में दिखाया गया आंकड़ा ₹500 करोड़ से अधिक है, जिसमें से अधिकांश पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास किया गया, जिससे सरकार को करोड़ों का सीधा कर नुकसान हुआ है। इस नेटवर्क के लेन-देन के पैटर्न, बैंक खातों, मेल आईडी, मोबाइल नंबर और आईटीसी क्लेम के बीच पूर्ण डिजिटल समन्वय पाया गया है, जिससे यह एक संगठित जीएसटी घोटाला सिंडिकेट सिद्ध होता है।
फर्जी फर्मों का विवरण
अब तक की जांच में आरोपी के नाम से 14 फर्जी फर्मों और 9 अन्य व्यक्तियों के नाम से संचालित फर्मों सहित कुल 23 से अधिक फर्मों का संचालन सामने आया है। इनमें से कुछ प्रमुख फर्मों का विवरण इस प्रकार है:
जगदम्बा कोल कैरियर्स फर्म (जबलपुर): इस फर्म के माध्यम से लगभग ₹59 करोड़ की फर्जी इनवॉयसिंग की गई और ₹18 करोड़ का फर्जी ITC लिया गया।
महामाया ट्रेडर्स (कोरबा, छत्तीसगढ़): कोल ट्रेडिंग के नाम पर बनाई गई इस फर्म से ₹30 करोड़ की बोगस इनवॉयस तैयार की गई और ₹8 करोड़ का फर्जी ITC क्लेम किया गया।
ब्लैक डायमंड ट्रेडकॉम (नागपुर): इस फर्म ने कथित तौर पर बिना किसी वास्तविक व्यापार के ₹15 करोड़ की इनवॉयस तैयार की और ₹4 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया।
जे.एम.डी.डी. स्टील्स प्रा. लि. (नागपुर): स्टील के नाम पर ₹80 करोड़ की फर्जी इनवॉयस जनरेट की गई और ₹20 करोड़ का आईटीसी क्लेम किया गया।
जे.एम.एस.डी. एलॉयज प्रा. लि. (नागपुर): ₹90 करोड़ की इनवॉयसिंग और ₹23 करोड़ का फर्जी ITC ट्रांसफर इस फर्म के माध्यम से हुआ।
जे.एम.के.डी. एनर्जी प्रा. लि. (नागपुर): इस ऊर्जा कंपनी के नाम पर ₹95 करोड़ के बिल बनाए गए, जिनके आधार पर ₹21 करोड़ का फर्जी ITC लिया गया।
सिनोट्रॉन मिनरल्स प्रा. लि. (नागपुर): खनिज व्यापार के नाम पर इस फर्म ने ₹26 करोड़ की फर्जी सप्लाई दिखाई और ₹6 करोड़ का ITC लिया।
डेवोर्स रिसोर्सेज प्रा. लि. (नागपुर): ₹30 करोड़ की इनवॉयसिंग और ₹9 करोड़ का फर्जी ITC इस कंपनी से हुआ।
ब्लू वर्थ ट्रेडकॉम प्रा. लि. (वर्धा): इस फर्म ने ₹7 करोड़ के इनवॉयस तैयार किए और ₹1.5 करोड़ का ITC लिया।
के.एस.के. सीमेंट (नागपुर): इस सीमेंट फर्म ने ₹20 करोड़ की इनवॉयसिंग की और ₹5 करोड़ का फर्जी ITC क्लेम किया।
भारत एलॉयज (नागपुर): ₹20 करोड़ की फर्जी बिक्री और ₹5 करोड़ का ITC क्लेम इस फर्म से हुआ।
राधाकृष्णा ट्रेडिंग कंपनी (नागपुर): ₹18 करोड़ की इनवॉयसिंग और ₹4 करोड़ का फर्जी टैक्स क्रेडिट प्राप्त किया गया।
आर्या कोल प्रा. लि. (नागपुर): ₹12 करोड़ की इनवॉयस और ₹3 करोड़ का आईटीसी लिया गया।
गिरिजन कोल प्रा. लि. (नागपुर): जिसने ₹10 करोड़ की फर्जी इनवॉयस बनाई और ₹2 करोड़ का फर्जी ITC लिया।

अब तक की जांच के मुख्य बिंदु
इनवॉयस वैल्यू: लगभग ₹512 करोड़ की फर्जी इनवॉयसिंग की गई है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की हानि: लगभग ₹130 करोड़ का अवैध ITC प्राप्त किया गया है।
प्रमुख राज्य: मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़।
मुख्य नेटवर्क लोकेशन: जबलपुर, नागपुर, बिलासपुर, कोरबा, रांची।
एन.के. खरे (फर्जी नाम): आरोपी विनोद सहाय स्वयं एन.के. खरे, नीलू सोनकर, आदि नामों से फर्जी ID बनाकर कार्य करता रहा।
बैंक खातों की संख्या: अब तक के साक्ष्यों से 150 से अधिक बैंक खाते ट्रेस हुए हैं जो आरोपी या उसके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित किए गए।
फर्जी दस्तावेज: आरोपी के कब्जे से कई ATM, बैंक अकाउंट पासबुक, मोबाइल जब्त किए गए हैं। उसके घर से विभिन्न विभागों की सीलें, नकली ट्रांसपोर्ट रसीदें, जीएसटी बिल बुक्स, पैन कार्ड, आधार कार्ड व अन्य प्रमाण पत्र भी जब्त किए गए हैं।
आगे की कार्रवाई
आरोपी विनोद सहाय को EOW द्वारा रांची (झारखंड) से ट्रांजिट रिमांड पर जबलपुर लाया गया है। वह फिलहाल 2 जुलाई तक की पुलिस अभिरक्षा में है। EOW द्वारा जांच निरंतर जारी है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य व्यक्तियों और कंपनियों पर भी कार्रवाई की जा रही है।







