राम सिया राम से लेकर हर हर नर्मदे तक, भक्ति में झूमी संस्कारधानी
दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव का हुआ समापन

जबलपुर, यशभारत। नर्मदा तट पर रविवार की रात भक्ति, संगीत और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। नर्मदा महोत्सव 2025 की यह सांस्कृतिक संध्या हर मायने में यादगार रही। जब प्रसिद्ध भजन गायिका मैथिली ठाकुर और सुप्रसिद्ध गायक लख्खा सिंह के भक्ति सुर गूंजे, तो पूरा परिसर हर हर नर्मदे के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने देर रात तक नर्मदा मैया के भजनों पर भावविभोर होकर झूमते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट की।
सुरों ने बाँधा ऐसा जादू कि झूम उठा जनसमुद्र

कार्यक्रम की शुरुआत मैथिली ठाकुर की मधुर वाणी से हुई। उन्होंने जय नर्मदे हर हर राम सिया राम और भव सागर से पार कर दो मैया नर्मदे जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। उनकी आवाज़ में भक्ति की वह गहराई थी जिसने हर श्रोता के मन को छू लिया।
श्रोताओं ने तालियों और “हर हर नर्मदे” के नारों से ऐसा उत्साह दिखाया कि पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। मंच के चारों ओर बैठे श्रद्धालु हाथ उठाकर सुरों के साथ झूमते रहे।
लख्खा सिंह के भजनों ने भर दिया आत्मिक सुकून

इसके बाद मंच पर पहुंचे प्रसिद्ध भजन गायक लख्खा सिंह, जिन्होंने अपने सुरीले भजनों से पूरे वातावरण को पवित्र भावों से भर दिया। उनके हरि नाम ही जीवन का आधार है और मन लगाओ नर्मदा मैया के चरणों में जैसे भजनों ने श्रोताओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराया। उनके सुरों में भक्ति की गहराई और लोकधुन की मिठास ने ऐसा माहौल बनाया कि हर चेहरा संतोष और श्रद्धा से झिलमिला उठा।
नर्मदा तट पर उमड़ा जनसैलाब
नर्मदा महोत्सव के इस आयोजन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दीपों की जगमगाहट और नर्मदा आरती के मंत्रोच्चार से पूरा तट आध्यात्मिक प्रकाश में नहा गया।परिसर में हर ओर नर्मदा मैया की महिमा के गीत गूंज रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी ने अपने मोबाइल की रोशनी से वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
संस्कृति, अध्यात्म और आनंद का संगम
सांस्कृतिक संध्या में संगीत के साथ-साथ भारतीय लोकनृत्य की भी अद्भुत झलक देखने को मिली। पारंपरिक परिधानों में सजे नर्तक-नर्तकियों ने जब ताल पर घुंघरू बजाए, तो ऐसा लगा मानो नर्मदा की लहरें ही नृत्य कर रही हों। रंग-बिरंगी रोशनी, मधुर संगीत और भक्ति के सुरों ने जबलपुर की इस शाम को अविस्मरणीय बना दिया।
श्रद्धालुओं ने कहा ऐसा भक्ति-मय वातावरण पहले कभी नहीं देखा”
शाम को उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि इस बार का नर्मदा महोत्सव संस्कारधानी के लिए गर्व का अवसर है। राम सिया राम से लेकर हर हर नर्मदे तक गूंजते सुरों ने न सिर्फ कानों को आनंद दिया, बल्कि आत्मा को भी छू लिया।







