इंदौरकटनीजबलपुरभोपालमध्य प्रदेशराज्य

सिंहस्थ, सीएस और सियासी संतुलन पर फोकस – सीएम डॉ. मोहन यादव की दिल्ली मौजूदगी

सिंहस्थ, सीएस और सियासी संतुलन पर फोकस
– सीएम डॉ. मोहन यादव की दिल्ली मौजूदगी
आशीष शुक्ला, भोपाल यशभारत।
प्रदेश की राजनीति में चल रही हलचल के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय बाद डॉ. यादव अपने प्रशासनिक अमले के साथ दिल्ली पहुंचे। वे जबलपुर से राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के साथ सीधे दिल्ली गए, जबकि उनकी प्रशासनिक टीम पहले ही भोपाल से दिल्ली रवाना हो चुकी थी। मुख्यमंत्री के इस दौरे में सिंहस्थ 2028 से लेकर मुख्य सचिव के कार्यकाल के विस्तार के साथ-साथ निगम-मंडलों की नियुक्ति व मंत्रिमंडल में कुछ चेहरों को अलग करके नए चेहरों को जगह देने से जोडक़र देखा जा रहा है साथ ही साथ प्रदेश संगठन की कार्यकारिणी भी आने वाले दिनों में गठित हो रही है । मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी मध्यप्रदेश प्रवास की तैयारियों से भी जुड़ा बताया जा रहा है। जहां वे मेट्रो का उद्घाटन करने भोपाल आ रहे हैं ।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस यात्रा का सीधा असर प्रदेश की सत्ता संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों पर देखने को मिलेगा।
क्या दिग्गजों की फिर से होगी पूछ-परख
मध्यप्रदेश की राजनीति में इस समय बड़े नेताओं को एडजस्ट करने की चुनौती सबसे अहम विषय बन गई है। पार्टी नेतृत्व और संगठन के सामने वीडी शर्मा, नरोत्तम मिश्रा, प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, सुरेश पचौरी, माखन सिंह भदौरिया और भूपेंद्र पंवार जैसे दिग्गज नेताओं की भूमिका तय करना आसान नहीं है। इन सभी का प्रदेश की राजनीति में बड़ा कद है और समर्थकों का व्यापक जनाधार भी है। इन्हें नई जिम्मेदारी सौंपने और संगठन में संतुलन बनाने की चुनौती पार्टी आलाकमान के सामने है। वहीं, अजय विश्नोई और सुरेश पचौरी जैसे वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं। वरिष्ठ नेता पार्टी की नीतियों और संगठनात्मक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर चुनावी माहौल में इनका महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में सत्ता और संगठन को संतुलित रखते हुए इन नेताओं को उपयुक्त जिम्मेदारी देना भाजपा के लिए एक बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक फैसला होगा।
सीएम की उपस्थिति में शाह की सिंहस्थ को लेकर अधिकारियों से चर्चा
– पक्के निर्माण को लेकर अलग-अलग राय
राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ मंगलवार को दिल्ली गए डॉ. मोहन यादव अपनी प्रशासनिक टीम के साथ शाम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निवास पहुंचे। इस बैठक में ष्टस् अनुराग जैन, ्रष्टस् संजय दुबे, ्रष्टस् डॉ. राजेश राजोरा, ्रष्टस् ष्टरू नीरज मंडलोई, ष्ठत्रक्क श्वह्रङ्ख उपेंद्र जैन, ष्टरू सचिव डॉ. इलैया राजा सहित उज्जैन के जिला अधिकारी आशीष सिंह, उज्जैन डीएम रोशन सिंह, उज्जैन के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। मध्यप्रदेश सरकार 2400 हेक्टेयर भूमि को लैंड पुलिंग के जरिए सिंहस्थ-2028 आयोजन हेतु विकसित करना चाहती है। बैठक में ्रष्टस् संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से जमीनी हालात और जरूरतों की जानकारी दी। अधिकारी लैंड पुलिंग के फायदे गिनाते रहे, लेकिन अमित शाह बार-बार यही सवाल उठाते रहे कि मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण क्यों आवश्यक है। उनका तर्क था कि यदि सरकार पक्का निर्माण करेगी तो भविष्य में किसान और भूमि मालिक भी स्थायी निर्माण करने लगेंगे, जिसे रोकना मुश्किल होगा।बैठक में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी मौजूद रहे। संतोष ने भी कुछ मुद्दों पर नाराजगी जताई। अफसर सफाई पेश करते रहे, लेकिन शाह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए।
बदल सकती है मंत्रिमंडल की तस्वीर
एक तरफ जहां मंत्रिमंडल विस्तार ,निगम-मंडलों की नियुक्तियों और संगठन में नई तैनाती को लेकर चर्चा तेज है। वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे हैं जोकुछ अलग ही संकेत दे रहे हैं । खास तौर पर सागर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना हुआ है जहां पर दिग्गज नेताओं की फौज है और कई बड़े दावेदार भी हैं । साथ ही साथ यहां की देवरी नगर पालिका के अधिकारी को हटाने को लेकर तलवारें खिंची हुई थी वह तो विधानसभा में ही सार्वजनिक हो चुकी हैं जहां क्षेत्रीय विधायक बृज बिहारी पटेरिया में यहां तक कह दिया था कि हाथ पीछे बंधे हुए हैं जवान में ताले लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व दिग्गज मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजे के यहां पड़ा छापा भी राजनीतिक विसात तैयार कर रहा है। इन सभी घटना क्रमो में सागर के ही एक बड़े नेता के तार जुड़े हुए हैं। वहीं भोपाल में भी बड़े ड्रग्स माफिया पर कार्यवाही के बाद कुछ बड़े सफेद पोश लोगों के नाम सत्ता के गलियारों में चर्चा बटोर रहे हैं, वहीं रायसेन से मंत्री का बयान और पत्रकार के साथ की गई उनकी कार गुजरी भी किसी से छुपी नहीं है । साथ ही साथ मालवा क्षेत्र से ही आने वाले एक और बड़े मंत्री के बयान सरकार के लिए फजीहत बने हुए हैं और उनकी विधानसभा में मौजूदगी कहीं न कहीं विपक्ष को हंगामा करने का मौका दे रही है।
शाह और सीएम की वन टू वन
अधिकारियों के प्रेजेंटेशन के बाद मुख्यमंत्री ने शाह से अलग से बंद कमरे में भी चर्चा की, जिसमें माना जा रहा है कि मुख्य सचिव के कार्यकाल विस्तार पर भी बातचीत हुई। उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव का कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा है और चर्चाएं तेज है कि उन्हें कार्य विस्तार दिया जाएगा, जिसको लेकर गृह मंत्री के साथ चर्चा की गई । हालांकि मुख्य सचिव को सीधे दिल्ली के रास्ते भोपाल भेजा गया है जो कि दिल्ली की पसंद बताई जा रहे हैं और उनकी नियुक्ति के पहले ही यह बात स्पष्ट थी कि उनके जल्द ही कार्यकाल पूरा हो रहा है, जबकि आदेश ऊपर से आया है तो फिर कार्यकाल बढ़ाने को लेकर हरी झंडी भी ऊपर से ही ली जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button