एमपी में मौत का नल: इंदौर में उठीं 8 अर्थियाँ, भोपाल के वाजपेयी नगर में 10 साल से ‘मौत’ बांट रहा प्रशासन

एमपी में मौत का नल: इंदौर में उठीं 8 अर्थियाँ, भोपाल के वाजपेयी नगर में 10 साल से ‘मौत’ बांट रहा प्रशासन
भोपाल, यशभारत: मध्य प्रदेश की सरकारी व्यवस्था अब लोगों की रगों में ‘धीमा जहर’ घोल रही है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे है लेकिन असली खौफ राजधानी भोपाल के वार्ड नंबर 10 (वाजपेयी नगर मल्टी) में है, जहाँ प्रशासन पिछले 10 सालों से एक बड़ी सामूहिक त्रासदी का इंतजार कर रहा है। यहाँ के निवासी एक-दो दिन नहीं, बल्कि एक दशक से सीवेज मिश्रित जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं
इंदौर: 100 से ज्यादा गंभीर, 8 घर उजड़े
इंदौर के भागीरथपुरा में हुई यह घटना व्यवस्था की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ठीक ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना दिया गया。 पाइपलाइन में लीकेज हुआ और ड्रेनेज का पानी सीधे लोगों के नलों तक पहुँच गया。 नतीजा यह हुआ कि अब तक 8 लोग दम तोड़ चुके हैं और 100 से ज्यादा मरीज गंभीर स्थिति में भर्ती हैं。 हालांकि मुख्यमंत्री ने जोनल अधिकारी और इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन 4 महीने पहले टेंडर होने के बावजूद काम न करना प्रशासन की नीयत पर बड़ा सवाल है
भोपाल: वाजपेयी नगर में 10 साल से जहर की सप्लाई
इंदौर की घटना ने भोपाल के वार्ड-10 के निवासियों के जख्मों को फिर हरा कर दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, वाजपेयी नगर मल्टी के लोग पिछले 10 सालों से गंदा पानी पी रहे हैं यहाँ की पाइपलाइनें पूरी तरह गल चुकी हैं और सीवेज की गंदगी के बीच से गुजर रही हैं पाइप फटे होने के कारण नलों से बदबूदार और गाढ़ा पीला पानी आता है, जिसे पीकर बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं स्थानीय निवासी रवि कौशव, लक्ष्मण और अमित कनाड़े का कहना है कि वे 10 साल से पार्षद और नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है
सिस्टम की बेशर्मी: ‘फाइल लगी है’ का रटा-रटाया बहाना
इंदौर में 8 मौतों के बाद प्रशासन जागा है, लेकिन भोपाल के वार्ड-10 में आज भी पार्षद और महापौर “फाइल लगी है” और “बड़ा काम है” कहकर पल्ला झाड़ रहे है र
हवासियों ने कई बार सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की, मगर सीवेज का निराकरण आज तक नहीं हो पाया
सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को भोपाल में भी इंदौर जैसी 8-10 मौतों का इंतजार है? क्या गरीब की जान इतनी सस्ती है कि उसे एक दशक तक सीवेज पिलाया जाए?
इंदौर की यह त्रासदी एक चेतावनी है कि भोपाल का वाजपेयी नगर किसी भी दिन ‘मौत का मोहल्ला’ बन सकता है। यदि आज पाइपलाइनें नहीं बदली गईं, तो कल की मौतों की जिम्मेदारी सीधे नगर निगम और लापरवाह अधिकारियों की होगी।







