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गया में आस्था की भीड़ – पितृपक्ष मेले में गूंजे शंख, छलका भावनाओं का सागर

गया,बिहार यशभारत

गया में आस्था की भीड़ – पितृपक्ष मेले में गूंजे शंख, छलका भावनाओं का सागर

गया,बिहार यशभारत जबलपुर,कटनी, भोपाल मंडला नरसिंहपुर, मुंबई सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस समय बिहार के गया शहर में पितृपक्ष मेले में उमड़ पड़े हैं। फल्गु नदी के घाटों पर हजारों की संख्या में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। शंखध्वनि, मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज से वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरा शहर श्रद्धा और आस्था के सागर में डूब गया हो।

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जबलपुर से पहुंचे श्रद्धालु

गया के घाटों पर जबलपुर से पहुँचे देवेंद्र त्रिपाठी ने भावुक स्वर में कहा – “यह अवसर केवल पूजा का नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की स्मृतियों को संजोने और उन्हें सम्मान देने का है।” उन्होंने बताया कि जबलपुर से कई परिवार इस बार पितृपक्ष श्राद्ध के लिए पहुँचे हैं। महिलाएँ पूजा की थालियाँ सजाकर श्राद्ध कर्म में जुटी हैं और घाटों पर आस्था का अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा है।

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पितरों की मुक्ति का महापर्व

गया में पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ पितृकर्म करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। कटनी निवासी अनंत गुप्ता ने बताया कि माहौल द्ववित करने वाला है, श्रद्धालु चावल, तिल और पुष्प अर्पित कर अपने पूर्वजों को तर्पण दे रहे हैं। इस दौरान कई लोगों की आँखें नम हो उठीं, मानो वे अपने दिवंगत प्रियजनों से सीधे संवाद कर रहे हों।

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ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान यहीं किया था। फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। इस वर्ष पितृपक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगा। वहीं 11 सितंबर को महाभरणी श्राद्ध विशेष रूप से किया जाएगा, जिसे पितृदोष निवारण का अत्यंत शुभ अवसर माना गया है।

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श्रद्धा और  संस्कृति का संगम

भोपाल के कोलर निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि पूरे गया शहर में इस समय अद्वितीय धार्मिक वातावरण है। धूप, दीप और पुष्पों की सुगंध, मंदिरों की घंटियों की गूंज और पंडितों के मंत्रोच्चार ने इसे किसी विराट धार्मिक उत्सव का रूप दे दिया है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पीढिय़ों के बीच जुड़ाव का प्रतीक है।

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