डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी, अश्लील सामग्री देखने का झूठा आरोप लगाकर वसूली

डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी, अश्लील सामग्री देखने का झूठा आरोप लगाकर वसूली
– साइबर अपराध शाखा, पुलिस आयुक्त भोपाल की चेतावनी नागरिक रहें सतर्क
भोपाल, यश भारत ।
राजधानी में डिजिटल गिरफ्तारी और अश्लील सामग्री देखने के झूठे आरोप लगाकर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। पुलिस कमिश्नरेट भोपाल की साइबर अपराध शाखा ने नागरिकों को सचेत किया है कि ठग स्वयं को पुलिस अधिकारी, अपराध शाखा या अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसे सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) अथवा इंटरपोल (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन) का अधिकारी बताकर डराते हैं।
कैसे रचते हैं साजिश?
ठग दूरभाष या व्हाट्सऐप कॉल कर कहते हैं कि आपकी इंटरनेट खोज इतिहास में आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है। इसके बाद कारावास, न्यायालयी कार्यवाही या सामाजिक माध्यमों पर बदनामी की धमकी दी जाती है। कई मामलों में वीडियो कॉल पर पुलिस वर्दी पहनकर फर्जी न्यायालय समन या गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है। फिर प्रकरण समाप्त करने के नाम पर यूपीआई या बैंक हस्तांतरण से धनराशि मांगी जाती है।
पहले भी सामने आए प्रकरण
हाल के महीनों में प्रदेश के कई शहरों से ऐसी शिकायतें मिली हैं। कुछ लोग भयवश हजारों से लेकर लाखों रुपये तक भेज चुके हैं। एक बार राशि देने पर ठग बार-बार अधिक धन की मांग करते हैं।
पुलिस का स्पष्ट संदेश
कोई भी एजेंसी दूरभाष या संदेश अनुप्रयोग पर समझौते के नाम पर धन नहीं मांगती। कानून में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी शासकीय विभाग आपसे बैंक विवरण, एकबारगी गुप्त कोड (ओटीपी) या निजी चित्र नहीं मांगता।
क्या करें?
ऐसा कॉल आए तो घबराएं नहीं, तुरंत संपर्क समाप्त करें। संबंधित नंबर अवरुद्ध करें और किसी भी स्थिति में धनराशि न भेजें।
साइबर ठगी की सूचना तत्काल हेल्पलाइन 9479990636 या राष्ट्रीय सहायता क्रमांक 1930 पर दें। शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है।







