भोपाल में ऑटो बने मुसीबत, यातायात व्यवस्था चरमराई

भोपाल में ऑटो बने मुसीबत, यातायात व्यवस्था चरमराई
– हर जगह खड़े ऑटो से जाम, लोगों की बढ़ी परेशानी
यश भारत भोपाल। भोपाल शहर में ऑटो रिक्शा आजकल आम जनता के लिए सुविधा कम और मुसीबत ज्यादा बनते जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों—एमपी नगर, न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, 10 नंबर, रेलवे स्टेशन के आस-पास हर जगह ऑटो बेतरतीब तरीके से खड़े हो जाते हैं। इससे न केवल सडक़ों पर जाम लगता है बल्कि पैदल चलने वालों और वाहन चालकों दोनों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
यातायात अमले की कार्रवाई के बावजूद हालात जस के तस
यातायात पुलिस द्वारा कई बार अभियान चलाकर चालान काटे गए, ऑटो हटाए गए और स्टैंड निर्धारित किए गए। इसके बावजूद हालात में खास सुधार नहीं हुआ। एमपी नगर और पुराने भोपाल के व्यस्त चौराहों पर रोजाना यातायात अमला तैनात रहता है, फिर भी ऑटो चालकों की मनमानी जारी है। कई चालक तय रूट और किराए की व्यवस्था का पालन नहीं करते, जिससे यात्रियों के साथ बहस व विवाद की स्थिति बन जाती है।
मनमानी और विवाद बढ़ा रहे तनाव
ऑटो चालकों की मनमानी के चलते कई बार यात्रियों को जबरन उतरना पड़ता है या उन्हें मनमाना किराया चुकाना पड़ता है। शिकायत करने पर झगड़े की नौबत आ जाती है। इससे आम नागरिकों में आक्रोश है। एमपी नगर, हबीबगंज और बोर्ड ऑफिस क्षेत्र में ऐसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।
जाम के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ीं
बिना नियम-कायदों के सडक़ किनारे और चौराहों पर ऑटो खड़े करने से न केवल ट्रैफिक धीमा पड़ता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। हाल के महीनों में एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और होशंगाबाद रोड पर कई हादसे हुए, जिनमें वाहन आपस में टकरा गए या पैदल चलने वाले घायल हुए। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित ऑटो पार्किंग और स्टैंड की कमी शहर के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है।
सख़्त कदम उठाने की मांग
नागरिकों ने प्रशासन और यातायात पुलिस से मांग की है कि ऑटो चालकों पर सख़्त कार्रवाई की जाए और उन्हें केवल निर्धारित स्टैंड पर खड़ा करने की व्यवस्था हो। साथ ही, ऑटो के पंजीकरण और परमिट की नियमित जाँच हो ताकि अवैध रूप से चल रहे वाहनों पर रोक लग सके।
समाधान के सुझाव
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में पर्याप्त संख्या में ऑटो स्टैंड बनाए जाएं, ऑटो चालकों को ट्रैफिक नियमों का प्रशिक्षण दिया जाए और मनमाने किराए पर रोक के लिए डिजिटल मीटर को अनिवार्य किया जाए। इससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी, जाम कम होगा और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।







