इंदौर गिरफ्तारी मामले में आया नया मोड़:, ‘घर से गिरफ्तारी’ लार्डगंज पुलिस की कहानी झूठी,आरोपियों को खुद थाने में कराया था पेश… वहीं पुलिस ने कहा- घटना की हुई है पूरी वीडियोग्राफी

जबलपुर यश भारत..इंदौर के चर्चित गिरफ्तारी मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। जबलपुर के लार्डगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत आदि अपार्टमेंट में रहने वाली शिखा शर्मा ने पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाए हैं, जिसमें आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया जाना बताया जा रहा है। शिखा शर्मा का कहना है कि पुलिस द्वारा लगाए जा रहे आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं।वहीं दूसरी तरफ मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि पूरी गिरफ्तारी के दौरान वीडियोग्राफी की गई है..तो इस प्रकार की बात होने का कोई सवाल ही नही उठता…
प्रेसवार्ता में रखा अपना पक्ष
शिखा शर्मा ने अपने अधिवक्ता के साथ प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि विगत दिनों उनके दामाद और उनके दो साथियों का नाम इंदौर की एक घटना के मामले में सामने आया था। इस संबंध में उन्होंने स्वयं पहल करते हुए तीनों को लार्डगंज थाने में पेश कराया था। उनका कहना है कि परिवार ने कानून से भागने या आरोपियों को संरक्षण देने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि उन्हें नियमानुसार पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया गया ..
‘घर से गिरफ्तारी’ के दावे को बताया गलत
शिखा शर्मा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पुलिस की ओर से यह प्रचारित किया जा रहा है कि आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया गया, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनका कहना है कि यदि उन्होंने स्वयं आरोपियों को थाने में पेश कराया, तो फिर घर से गिरफ्तारी का दावा समझ से परे है। उन्होंने पुलिस के इस कथन को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया है।
लार्डगंज पुलिस ने इंदौर पुलिस को सौंपा
शिखा शर्मा के अनुसार, जब आरोपियों को लार्डगंज थाने में पेश किया गया, तब स्थानीय पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और इसके बाद उन्हें इंदौर पुलिस के हवाले कर दिया। उनका कहना है कि पूरी कार्रवाई विधिसम्मत तरीके से हुई, लेकिन बाद में पुलिस की ओर से जो जानकारी सामने आई, उसने पूरे मामले को अलग दिशा दे दी।
सामाजिक छवि खराब करने का आरोप
शिखा शर्मा और उनके अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस के इस तरह के दावे से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि जिस प्रकार से घर से गिरफ्तारी की बात कही जा रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो उन्होंने आरोपियों को अपने यहां शरण दे रखी थी, जबकि उन्होंने खुद उन्हें थाने पहुंचाने का काम किया।
मामले में खड़े हुए नए सवाल
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब गिरफ्तारी की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को गिरफ्तारी बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार का दावा है कि यह आत्मसमर्पण जैसी स्थिति थी, क्योंकि आरोपियों को स्वयं थाने में पेश कराया गया था। ऐसे में अब यह मामला केवल गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि तथ्यात्मक दावों की सत्यता का भी बन गया है।
पुलिस के आधिकारिक जवाब का इंतजार
फिलहाल इस नए मोड़ पर पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, शिखा शर्मा के बयान के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है और अब सभी की नजरें पुलिस के पक्ष पर टिकी हैं। आने वाले समय में यदि पुलिस इस पर स्पष्ट जवाब देती है, तो पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।
फॉलोअप में बढ़ी दिलचस्पी
इंदौर हत्या और गिरफ्तारी प्रकरण में आए इस नए मोड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस अपने दावे के समर्थन में क्या तथ्य रखती है और शिखा शर्मा के आरोपों पर क्या जवाब देती है। इस प्रकरण ने गिरफ्तारी की कहानी को नया आयाम दे दिया है।







