भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल में चिकित्सा की बड़ी उपलब्धि बंसल अस्पताल में 500 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट

भोपाल में चिकित्सा की बड़ी उपलब्धि बंसल अस्पताल में 500 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट

यश भारत भोपाल। राजधानी के बंसल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 500 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट पूरे कर लिए हैं। यह उपलब्धि अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम अत्याधुनिक तकनीक और मरीजों के भरोसे का परिणाम मानी जा रही है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अब तक किए गए ट्रांसप्लांट्स में कई जटिल और आधुनिक प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। इनमें 70 से अधिक ABO इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट जब डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप अलग होता है 25 स्वैप ट्रांसप्लांट, 20 कैडेवर ट्रांसप्लांट और 7 पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। ट्रांसप्लांट टीम में प्रमुख रूप से नेफ्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी, डॉ. हर्षिता शर्मा, ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संतोष अग्रवाल, डॉ. अमित कुमार झा और डॉ. मानव गिडियन शामिल हैं। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. दीपा नवकार, डॉ. रितेश जैन, डॉ. लक्ष्मीकांत बनाबाकोडे और डॉ. अभिनव सराफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग से डॉ. कमलेश तलेसरा और डॉ. राहुल जैन के साथ ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर रविंद्र और अंकुर का भी अहम योगदान रहा। ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संतोष अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में डोनर की सर्जरी लेप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाती है, जिससे डोनर को कम दर्द होता है और वह लगभग एक सप्ताह के भीतर घर लौट सकता है। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए न केवल मध्यप्रदेश बल्कि आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंच रहे हैं।
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विद्यानंद त्रिपाठी के अनुसार किडनी फेलियर के मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस की तुलना में अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने कहा कि ABO इनकम्पैटिबल और स्वैप ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाओं से अब ब्लड ग्रुप की बाधा भी काफी हद तक समाप्त हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर वैश्विक मानकों के बराबर है। डॉ. अमित कुमार झा ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन में लौटी उम्मीद और नए जीवन का प्रतीक है। वहीं डॉ. हर्षिता शर्मा ने बताया कि जटिल ट्रांसप्लांट मामलों में भी मरीजों की रिकवरी सामान्य ट्रांसप्लांट की तरह ही होती है और सफलता दर भी बेहतर रहती है।
अस्पताल के प्रबंध निदेशक सुनील बंसल ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अस्पताल भविष्य में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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