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राज्यसभा में गूँजा जहरीली कफ सिरप का मुद्दा: विवेक तन्खा ने सरकार को घेरा, मिलावट के मामलों में यूपी शीर्ष पर, एमपी में 35 लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली/जबलपुर। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप के सेवन से मासूम बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर संसद में गूंज उठा। राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद विवेक के. तन्खा ने दवाओं की गुणवत्ता, नियामक व्यवस्था और मिलावटखोरी पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश की दवा सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदी दोबारा न हो।
छिंदवाड़ा कांड का संसद में उठा मुद्दा
राज्यसभा में चर्चा के दौरान सांसद विवेक तन्खा ने छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत का मामला उठाते हुए कहा कि यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश की दवा नियामक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है।
केंद्र सरकार ने पेश की कार्रवाई की रिपोर्ट
तन्खा के सवालों के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में कफ सिरप और अन्य दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया गया है।
सरकार के अनुसार दिसंबर 2022 से अब तक 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं की जांच की गई है। इसके अलावा 960 औषधि निर्माण इकाइयों का जोखिम आधारित निरीक्षण किया गया, जिनमें खामियां मिलने पर कड़ी कार्रवाई की गई।
860 से अधिक मामलों में हुई दंडात्मक कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 860 से अधिक दंडात्मक कार्रवाइयां की गईं। इनमें कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए, कुछ इकाइयों का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया और कई मामलों में जुर्माना तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की गई। सरकार का कहना है कि दवा सुरक्षा को लेकर अब निगरानी और सख्ती पहले से ज्यादा बढ़ा दी गई है।
मिलावट के मामलों में यूपी देश में सबसे आगे
सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं मानक (FSS) अधिनियम के तहत कार्रवाई के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। वर्ष 2024-25 में यूपी में 30,380 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जो देश में सबसे अधिक है। इसके साथ ही 14,920 सिविल मामलों में भारी जुर्माना लगाया गया, जिससे यह साफ होता है कि वहां बड़े पैमाने पर मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की गई।
मध्यप्रदेश में भी सख्त कार्रवाई
मध्यप्रदेश में भी मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा को लेकर पिछले तीन वर्षों में व्यापक जांच अभियान चलाया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2025 के बीच प्रदेश में 40,425 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इस दौरान 6,443 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया और 139 आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई।
35 खाद्य व्यवसाय संचालकों के लाइसेंस रद्द
मानकों का पालन न करने और मिलावट के गंभीर मामलों में मध्यप्रदेश में 35 खाद्य व्यवसाय संचालकों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है और मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा

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