महाकाल मंदिर में आरती शुल्क का विरोध तेज

महाकाल मंदिर में आरती शुल्क का विरोध तेज
– संस्कृति बचाओ मंच ने कहा धर्मस्थलों पर वीआईपी व्यवस्था और शुल्क प्रथा बंद हो
भोपाल, यश भारत। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भस्म आरती और सायं आरती के लिए शुल्क लिए जाने के मुद्दे पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। संस्कृति बचाओ मंच एवं श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे आस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय बताया है।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए तिवारी ने कहा कि धर्मस्थलों पर किसी भी प्रकार की शुल्क प्रथा आम श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करती है। उनका कहना था कि भगवान के दरबार में राजा और रंक दोनों समान होते हैं, ऐसे में आरती दर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणियां या विशेष शुल्क व्यवस्था उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि धार्मिक स्थलों पर शुल्क और विशेष प्रवेश व्यवस्था लागू की जाएगी तो आम श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो सकती है।
तिवारी ने मुगलकालीन जजिया कर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में भी तीर्थ यात्राओं पर कर लिया जाता था, और आज यदि आधुनिक समय में भी तीर्थ स्थलों पर इसी प्रकार की व्यवस्था लागू होती है तो यह चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि महाकाल मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख सनातन धर्मस्थलों पर शुल्क प्रथा और तथाकथित वीआईपी संस्कृति समाप्त की जाए। संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय को लेकर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देशभर के धार्मिक स्थलों पर एक समान व्यवस्था लागू करने का आग्रह करेंगे, ताकि आम श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के दर्शन का अवसर मिल सके।







