
जबलपुर, यशभारत। वर्ष 1993 से निरंतर आयोजित ‘अरुणोदय’ सम्मान समारोह का 31वां आयोजन संस्कारधानी में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। प्रभु आराधना एवं दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ हुए समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, कुलपति पी.के. मिश्रा और वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे, जबकि लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह एवं राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने वर्चुअल माध्यम से अपने संदेश दिए।अपने उद्बोधन में एन.के. सिंह ने पत्रकारिता के समक्ष राज्यसत्ता, विज्ञापन दबाव और कॉर्पोरेट प्रभाव जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए निष्पक्षता को सर्वोपरि बताया। महापौर अन्नू ने मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि “एक स्तंभ कमजोर होगा तो पूरा ढांचा डगमगा जाएगा।” कुलपति पी.के. मिश्रा ने एआई के दौर में विश्वसनीयता को सबसे बड़ी चुनौती बताया, वहीं चैतन्य भट्ट ने पंडित अरुण शुक्ला के जज्बे को याद करते हुए कहा कि “पत्रकारिता नौकरी नहीं, समाज के प्रति जवाबदेही है।”अतिथियों का आत्मीय स्वागत शुक्ला परिवार द्वारा किया गया और समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान राशि से अलंकृत किया गया तथा अंत में ‘अरुणोदय डायरी’ का विमोचन कर पंडित अरुण शुक्ला की स्मृतियों को नमन किया गया।आशीष शुक्ला की पुत्री यशिका ईशानी शुक्ला ने आत्मविश्वासपूर्ण स्वागत भाषण देकर आयोजन को आत्मीयता प्रदान की।वही मंच का संचालन एडवोकेट संपूर्ण तिवारी ने किया

वर्चुअल उद्बोधन: स्मृतियों और संकल्पों का संगम
लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने अपने वर्चुअल संदेश में कहा कि “पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की शक्ति है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।” उन्होंने पंडित अरुण शुक्ला की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी पत्रकारिता के लिए मार्गदर्शक हैं। विधानसभा सत्र के कारण उपस्थित न हो पाने पर खेद व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी सम्मानित प्रतिभाओं को शुभकामनाएं दीं।

दिन केवल स्मृति का नहीं, संकल्प का भी -तंखा
राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने अपने उद्बोधन में 20 फरवरी की तिथि को भावनात्मक रूप से विशेष बताते हुए कहा कि “यह दिन केवल स्मृति का नहीं, संकल्प का भी दिन है। स्मृतियों को सम्मान में बदलना समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि आशीष शुक्ला ने अपने माता-पिता की स्मृतियों को सम्मान समारोह के रूप में जीवित रखकर एक अनूठी परंपरा स्थापित की है। उन्होंने आयोजन की निरंतरता और गरिमा की सराहना करते हुए कहा कि “सम्मान देना सबसे बड़ा संस्कार है।
पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियों पर गहन विमर्श
अपने उद्बोधन में एन.के. सिंह ने पत्रकारिता के सामने उपस्थित तीन प्रमुख संकट—राज्यसत्ता का दबाव, विज्ञापनदाताओं का प्रभाव और कॉर्पोरेट घरानों का नियंत्रण—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी काल से लेकर वर्तमान समय तक प्रेस की स्वतंत्रता निरंतर चुनौतियों से घिरी रही है।
उन्होंने वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के क्षरण और ट्रेड यूनियनों के कमजोर पड़ने को पत्रकारों के अधिकारों के लिए चिंताजनक बताया।
सम्मानित हुईं विशिष्ट प्रतिभाएं
समारोह में पत्रकारिता, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को मेडल, स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल एवं सम्मान राशि से अलंकृत किया गया।
सम्मानितों में राजकुमार रैकवार, आलोक बैनर्जी (नई दुनिया), रवि अग्रवाल (फिल्म निर्माता), अरविंद पांडे, अजय क्षेत्री (रायपुर), लाली कोष्टा, आशीष रैकवार, प्रदेश टुडे, राजेंद्र पांडे, शिवकुमार चौबे (टीवी9 भारतवर्ष), दृष्टि जैन (इंडियन एक्सप्रेस, नई दिल्ली) सहित अनेक नाम शामिल रहे।
पुलिस और मीडिया: परस्पर सहयोग का संबंध
6वीं बटालियन के एसपी सिद्धार्थ चौधरी ने कहा कि 18 वर्ष बाद इस कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि कई बार क्राइम रिपोर्टर पुलिस से पहले घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं और महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को पत्रकारों से प्राप्त होती हैं। बदलते दौर में एआई और डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी सम्मानित पत्रकारों को बधाई दी।
मीडिया और पुलिस “सिक्के के दो पहलू
ASP पल्लवी शुक्ला ने कहा कि मीडिया और पुलिस “सिक्के के दो पहलू” हैं। पत्रकार समाज को वास्तविकता का आईना दिखाते हैं और पुलिस के सकारात्मक कार्यों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्वसनीयता और तकनीक के दौर की चुनौती
कुलपति पी.के. मिश्रा ने कहा कि वे पिछले दस वर्षों से इस आयोजन में लगातार आ रहे हैं और 31 वर्षों की निरंतरता अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विस्तार के साथ पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है। एआई के युग में विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
चैतन्य भट्ट का भावपूर्ण संबोधन
वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट ने अपने संबोधन में भावुकता, अनुभव और स्पष्टवादिता के साथ पत्रकारिता के अतीत और वर्तमान पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज जिस पत्रकारिता की हम चर्चा कर रहे हैं, उसकी बुनियाद उन लोगों ने रखी थी जिनके लिए यह पेशा नहीं, बल्कि जुनून और मिशन था। पंडित अरुण शुक्ला उन्हीं विरले हस्ताक्षरों में से एक थे।उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि जब वे देशबंधु में साथ काम करते थे, तब अरुण शुक्ला जी का कार्य करने का तरीका बिल्कुल अलग था। वे केवल खबर लिखने तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि खबर के पीछे छिपे सत्य को खोजने का साहस रखते थे। रात के 12 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचकर रिपोर्टिंग करना और प्रशासन को झकझोर देने वाली खबर लिखना उनके जज्बे का उदाहरण था। पत्रकारिता उनके लिए नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही थी।चैतन्य भट्ट ने कहा कि आज पत्रकारिता कई प्रकार के दबावों के बीच खड़ी है। उन्होंने ‘जनोन्मुखी पत्रकारिता’, ‘सेठ-आश्रित पत्रकारिता’ और ‘राजा-आश्रित पत्रकारिता’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अखबार निकालना हिमालय पर चढ़ने जैसा कठिन कार्य हो गया है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और जिम्मेदारी
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने अपने संबोधन में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि यदि चारों स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया—मजबूत रहेंगे तभी लोकतंत्र सशक्त रहेगा। यदि एक स्तंभ कमजोर होगा तो पूरा ढांचा डगमगा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मीडिया और प्रशासन का संबंध प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि परस्पर उत्तरदायित्व का है। मीडिया समाज का आईना है। वह सरकार और प्रशासन को उनकी कमियों का अहसास कराता है और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। कई बार समाचार कठोर प्रतीत होते हैं, परंतु वे सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
अन्नू ने कहा कि समय बदल रहा है। आज डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। खबरें पलभर में वायरल होती हैं। ऐसे समय में जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे तथ्यपरकता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि जनता का भरोसा ही मीडिया की सबसे बड़ी पूंजी है।
उन्होंने आशीष शुक्ला की निरंतरता की सराहना करते हुए कहा कि 31 वर्षों तक एक ही उद्देश्य के साथ आयोजन करना आसान नहीं है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कारधानी की सांस्कृतिक धरोहर बन चुका है। अपने माता-पिता की स्मृति को सम्मान समारोह के माध्यम से जीवित रखना एक प्रेरक उदाहरण है, जिससे समाज में पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं को मजबूती मिलती है।
‘अरुणोदय डायरी’ का विमोचन और भविष्य का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ‘अरुणोदय डायरी’ का विमोचन किया गया, जो पंडित अरुण शुक्ला की स्मृतियों और विचारों को समर्पित है।31 वर्षों से निरंतर आयोजित इस समारोह के माध्यम से शुक्ला परिवार ने अपने माता-पिता की स्मृतियों को जीवित रखते हुए पत्रकारिता की अलख जगाए रखने का संकल्प दोहराया। मुंबई में कदम रखने के बाद शीघ्र ही रायपुर में विस्तार की घोषणा भी की गई।संस्कारधानी में पत्रकारिता के इस सतत प्रवाह को समाज का सहयोग मिलता रहे, इसी कामना के साथ 31वां ‘यशभारत’ सम्मान समारोह प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।
गरिमामयी उपस्थिति और आत्मीय स्वागत
समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, कुलपति पी.के. मिश्रा, मनोहर वर्मा, चैतन्य भट्ट, सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत सौरभ शुक्ला, अभिषेक शुक्ला, डॉ. अर्पित शुक्ला, अस्तित्व शुक्ला, कृष्णा शुक्ला, अर्थ शुक्ला, साक्षी शुक्ला, सांझ शुक्ला, आदित्य तिवारी, अंकित शुक्ला, नवनीत जैन सहित परिजनों एवं सहयोगियों ने किया।







