मध्य प्रदेशराज्य

नई जेल पर ‘फाइल-फाइल’ का खेल: खुला 80 हेक्टेयर जमीन और अटकी DPR का राज

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब सागर के विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। मामला सागर की ‘नई केंद्रीय जेल’ के निर्माण का था, जो पिछले कई सालों से प्रशासनिक सुस्ती और फाइलों के फेर में उलझा हुआ है। सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा सदन में अपनी ही सरकार की घेराबंदी करना अब राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान विधायक शैलेंद्र जैन ने अपने तेवर दिखाते हुए सरकार से सीधी ‘प्रगति रिपोर्ट’ मांग ली। उन्होंने सवाल उठाया कि ग्राम चितौरा में 80 हेक्टेयर (लगभग 200 एकड़) की विशालकाय भूमि आवंटित हुए अरसा बीत गया, लेकिन निर्माण की पहली ईंट अब तक क्यों नहीं रखी गई? उन्होंने सरकार से पूछा कि इस हाई-टेक जेल के लिए बजट की क्या स्थिति है और जमीन पर वास्तविक काम कब शुरू होगा? विधायक के इन सुलगते सवालों ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

 बजट के लिए ‘पुनर्घनत्वीकरण’ का पेच

प्रश्न के उत्तर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जो जानकारी दी, वह इस प्रोजेक्ट की असली “अंदर की बात” बयां करती है। दरअसल, सरकार इस विशाल जेल का निर्माण सीधे सरकारी बजट से करने के बजाय ‘पुनर्घनत्वीकरण योजना’ (Redensification Scheme) के तहत करना चाहती है। “अंदर की खबर” यह है कि शहर के बीचों-बीच स्थित पुरानी जेल की अरबों रुपये की कीमती जमीन को विकसित कर उससे मिलने वाले फंड से ही चितौरा में नई जेल बनाई जानी है। यही ‘जमीन का गणित’ इस पूरे प्रोजेक्ट की देरी का मुख्य कारण बना हुआ है।

 ‘उम्रकैद’ काट रही फाइल

सदन में हुए खुलासे ने सरकारी सिस्टम की कछुआ चाल को भी बेनकाब कर दिया है। प्रोजेक्ट की DPR (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) 25 अगस्त 2025 को साधिकार समिति के पास भेजी गई थी। समिति ने उसे हरी झंडी देने के बजाय ‘सुधार’ के नाम पर वापस कर दिया। इसके बाद जेल विभाग ने 3 नवंबर 2025 को फिर से प्रस्ताव भेजा है। विधायक शैलेंद्र जैन ने इसी बात पर आपत्ति जताई कि जब जमीन आवंटित है, तो अधिकारी फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल पर क्यों घुमा रहे हैं?

विधायक जैन की इस घेराबंदी के पीछे सागर शहर के विकास का बड़ा विजन है। वर्तमान जेल शहर के हृदय स्थल पर होने के कारण सुरक्षा और यातायात के लिए बड़ी सिरदर्द बनी हुई है। नई जेल के चितौरा शिफ्ट होते ही शहर को एक बड़ा ‘स्पेस’ मिलेगा, जिससे सागर के विस्तार का रास्ता साफ होगा। अब देखना यह है कि विधायक की इस धमाकेदार सक्रियता के बाद ‘कैद’ हुई फाइल को कब रिहाई मिलती है और चितौरा की जमीन पर काम कब शुरू होता है।

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