कॉलोनी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा हरियाली के लिए होगा आरक्षित, मुख्य मार्ग तक 24 से लेकर 30 मीटर तक होंगी चौड़ी सडक़ें, टॉउन शिप के लिए सरकार ने बनाई नई पॉलिसी

कटनी, यशभारत। सरकार ने एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी नियम 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें कॉलोनाइजर के लिए ग्रीन एनर्जी और ग्रीन एफएआर का प्रावधान किया गया है। हरियाली के लिए अब भवन का फ्लोर और कॉरपेट एरिया बढ़ा सकेंगे। इसके अलावा कॉलोनी एरिया का 2.5 प्रतिशत हिस्सा वनीकरण के लिए छोडऩा होगा। इसमें से 50 प्रतिशत घने, हरियाली वाले स्थानीय प्रजाति के फलदार पौधे लगाने होंगे। इसी तरह से कॉलोनाइजर यदि जरूरत की कुल बिजली का 35 प्रतिशत या अधिक ऊर्जा गैरपारंपरिक स्रोत से तैयार करता है, तो अतिरिक्त तल क्षेत्र दिया जाएगा। अच्छी बात यह है कि नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे को मिलने वाली कॉलोनी तक के लिए सडक़ की चौड़ाई 24 से लेकर 30 मीटर तक होगी। इसके लिए राशि कॉलोनाइजर उपलब्ध कराएगा। जबकि निर्माण सरकार की एजेंसी करेगी। जानकारी के मुताबिक कॉलोनी के कुल एरिया का 15 प्रतिशत कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित होगा। 5 प्रतिशत सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ा जाएगा। 5 लाख से कम आबादी वाली टाउनशिप के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में साधिकार समिति होगी। समिति टाउनशिप से जुड़े सभी तरह के निर्णय लेगी।
क्या होती है एकीकृत टाउनशिप
एकीकृत टाउनशिप में संपूर्ण विकसित नियोजित शहर होता है। इस टाउनशिप में रोजगार उद्योग, कार्यालय, शापिंग काम्प्लेक्स, मॉल सहित व्यावसायिक, मनोरंजन तथा आवासीय एरिया एक कॉलोनी में होते हैं। लोगों को रोजगारए पढ़ाई करनेए बिना प्रदूषण वाले उद्योग लगाने, माल बेचने के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ता है। इसके साथ ही स्कूलए कॉलेज, सरकारी कार्यालय वहीं पर बनाए जाते हैं। यह पूरी तरह से नियोजित शहर होता है। जिसे बड़े शहरों से जोडऩे के लिए सरकार रेलए हाइवे की बेहतर कनेक्टिविटी देता है कॉलोनाइजर का पांच वर्ष के लिए पंजीयन होगा। इसके बाद शुल्क के साथ नवीनीकरण कर सकेगा। पंजीयन के लिए एक प्रधिकारी होगाए जो ऑनलाइन पंजीयन करेगा। कॉलोनाइजर को तीन चरणों में भूमि का विकास करना होगा। दूसरे अथवा तीसरे चरण की अनुमति तभी मिलेगी जब पहले चरण का 50 प्रतिशत काम पूरा करेगा।
सरकार करेगी बाहर का विकास
कॉलोनी के बाहर सडक़, बिजली, पानी, सीवेज लाइन, सहित अन्य सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराएगी, लेकिन इसका खर्च कॉलोनाइजर को देना होगा। कॉलोनाइजर को पंचायत एवं निकायों को शुल्क देना होगा। निकायों को भूमि के बजार मूल्य का 0.50 प्रतिशत तथा पंचायतों को प्रति हेक्टयर 10 हजार रुपए विकास शुल्क देना होगा।
ये होगा मानदंड
पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए कम से कम 10 हेक्टेयर तथा पांच लाख से अधिक आबादी वाले नगरों के लिए कम से कम 20 हेक्टेयर क्षेत्र होगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर की समय सीमा तय करना जरूरी होगी। अधिकारियों का कहना है कि एकीकृत टाउनशिप नियम से एक अच्छी पहल है। इसमें सडक़ें, बल्क वॉटर, पावर, सीवरेज कनेक्टिविटी सहित तमाम इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की समय सीमा होनी चाहिए।







