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जानलेवा बने कोरियन गेम्स, गाजियाबाद में तीन बहनों की एक साथ आत्महत्या की घटना ने जबलपुर में बढ़ाई चिंता

शहर में भी बच्चों के बीच कोरियन गेम्स की बढ़ी दीवानगी, घटना ने पूरे देश को झकझोरा

जबलपुर। गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा एक साथ आत्महत्या किए जाने की दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि बच्चियां कोरियन गेम से जुड़े ऑनलाइन टास्क से प्रभावित थीं, जिससे डिजिटल कंटेंट और बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जबलपुर में भी दिख रहा ऐसा ही डिजिटल ट्रेंड

इस घटना के बाद जबलपुर में भी अभिभावकों, शिक्षकों और काउंसलरों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, शहर में भी कई बच्चेविदेशी गेम्स और कंटेंट में जरूरत से ज्यादा समय बिता रहे हैं,अपनी उम्र और सामाजिक पहचान से कटते जा रहे हैं,और परिवार से भावनात्मक दूरी बना रहे हैं।

कोरियन गेम, भाषा और कंटेंट की गहरी पकड़

तीनों बच्चियां कोरियन गेम्स, म्यूजिक और ऑनलाइन वीडियो कंटेंट से अत्यधिक प्रभावित थीं। उन्होंने यूट्यूब की मदद से कोरियाई भाषा सीख ली थी और घर में आपस में भी उसी भाषा में बातचीत करती थीं। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल भी बनाया था, जिस पर कोरियन-थीम आधारित कंटेंट डाला जाता था।

पिता की डांट और मोबाइल छीनना बना टर्निंग पॉइंट

पुलिस जांच में सामने आया कि घटना से पहले बच्चियों के पिता ने उन्हें डांटा था और मोबाइल फोन छीन लिया था। इसके बाद तीनों बहनों—निशिका (16 वर्ष), प्राची (14 वर्ष) और पाखी (12 वर्ष)—ने 3 फरवरी की रात करीब 2 बजे आत्मघाती कदम उठा लिया। करीब 10 घंटे की छानबीन के बाद जांच की दिशा पूरी तरह स्पष्ट हो सकी।

डायरी ने खोले मानसिक स्थिति के राज

कमरे से मिली डायरी और परिजनों के बयानों से यह बात सामने आई कि बच्चियां खुद को भारतीय नहीं, बल्कि कोरियन पहचान से जोड़ने लगी थीं। उन्होंने अपने नाम बदल लिए थे और भारतीय समाज से धीरे-धीरे मानसिक दूरी बना ली थी।

विशेषज्ञों की राय: पहचान भ्रम है बड़ा खतरा

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कम उम्र में बच्चों का खुद को किसी दूसरी संस्कृति या पहचान से जोड़ना मानसिक असंतुलन और निर्णय क्षमता में कमजोरी पैदा कर सकता है। यदि समय रहते संवाद और मार्गदर्शन न मिले, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

अभिभावकों के लिए सख्त चेतावनी – विशेषज्ञों ने चेताया है कि अचानक मोबाइल छीनना,सख्त डांट या तुलना,और संवाद की कमी स्थिति को और बिगाड़ सकती है। बच्चों की डिजिटल दुनिया को समझना और संवेदनशील तरीके से नियंत्रण जरूरी है।

एक घटना, कई सवाल

यह मामला केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि डिजिटल लत, कोरियन गेम्स का अंधानुकरण और पारिवारिक संवाद की कमी का खतरनाक उदाहरण बनकर सामने आया है। यह घटना जबलपुर सहित हर शहर के अभिभावकों के लिए चेतावनी है मानसिक तनाव या आत्मघाती विचार आने पर तुरंत परिवार, शिक्षक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। मदद लेना कमजोरी नहीं है।

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