कटनीमध्य प्रदेश

ऐतिहासिक अशोक स्तंभ को जेसीबी से किया ध्वस्त, 6 दशक पूर्व कांग्रेस नेता शंभू भाटिया चौरसिया ने करवाया था निर्माण

उमरियापान, यशभारत। उमरियापान के मुख्य मार्केट झंडा चौक में स्थापित अशोक स्तंभ को जेसीबी मशीन से ग्राम पंचायत द्वारा ध्वस्त कराया गया है। अब यहां नए आकार के अशोक स्तंभ को पुन: स्थापित किया जाएगा। वहीं जो नगरवासी कल रात को अशोक स्तंभ को सुरक्षित देखकर गए थे, दूसरे दिन सुबह अशोक स्तंभ को पूरी तरह से ध्वस्त देखा तो सभी हरप्रभ रह गए। जानकारी के अनुसार रविवार की रात इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम देने से पहले कटनी रोड, सिहोरा रोड और ढीमरखेड़ा रोड को बैरिकेट लगाकर रास्ता बंद किया गया। देश का राष्ट्रीय प्रतीक होने के कारण सबसे पहले तोड़ा गया फिर जेसीबी मशीन से पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित तरीके से उतारा गया। इसके बाद 15 फिट ढांचे को मशीन से ध्वस्त किया गया। इस दौरान नगर की 5-6 दशक पुरानी धरोहर को ध्वस्त होता देखने के लिए नगरवासियों की बड़ी तादाद में मौजूदगी रही। कार्रवाई के दौरान सरपंच अटल ब्यौहार, कांग्रेस भाजपा के नेता सहित नगरवासियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से थाना प्रभारी दिनेश तिवारी से स्टाफ उपस्थित रहा।
शंभू भाटिया ने यूपी से बुलवाकर करवाया था निर्माण
बुजुर्गों ने बताया कि स्व. शंभू भाटिया चौरसिया कांग्रेस नेता और नगर सहित क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। जिन्हें पूरा क्षेत्र माल गुजार के नाम से जानता था। 5-6 दशक पूर्व स्व. शंभू भाटिया चौरसिया बनारस घूमने गए थे। बनारस से 10 से 15 किलोमीटर दूर सारनाथ भी घूमने पहुंचे थे, जहां अशोक स्तंभ में चारों दिशाओं से दहाड़ते सिंह की आकृति देख बहुत प्रभावित हुए थे और उसी क्षण इरादा पक्का कर लिया था की उमरियापान में भी इसी रूप में अशोक स्तंभ को स्थापित किया जाएगा। फिर पूरी जानकारी लेकर वापस उमरियापान आए थे। बुजुर्गों ने बताया कि कुछ दिन बाद जहां यह बलुआ पत्थर पाया जाता है। मिर्जापुर के चुनार गए थे और कारीगरों को उसी आकृति की प्रतिमा का ऑर्डर देकर आए थे। तैयार होने के बाद नगर के हृदय स्थल झंडा चौक में 15 फिट की छतरी नुमा के ऊपर शान से स्थापित करवाया था। जिसे 18 जनवरी 6 की शाम तक स्व. शंभू भाटिया की धरोहर के नाम से जाना गया लेकिन अब इस धरोहर को और स्वर्गीय श्री चौरसिया के नाम को इतिहास के पन्नों में ही जाना जाएगा।
देश में अशोक स्तंभ का इतिहास
अशोक स्तंभ के सिंहों को 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई थी। ये दहाड़ते हुए सिंह धर्म, चक्र, प्रवर्तन के रूप में दृष्टिमान हैं। गौतम बुद्ध ने वर्षावास समाप्ति पर भिक्षुओं को चारों दिशाओं में जाकर लोक कल्याण हेतु बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का आदेश दिया था, जो उत्तर प्रदेश के सारनाथ के नाम से विश्विविख्यात है। इसलिए यहां पर मौर्य साम्राज्य के तीसरे सम्राट व सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने चारों दिशाओं में गर्जना करते हुए शेरों को बनवाया था। सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए स्तंभों में उत्तर प्रदेश के सारनाथ के स्तंभ को सबसे बेहतर माना जाता है। इसमें सबसे ऊपर चारों दिशाओं में चार सिंह बने हुए हैं। यह चुनार के बलुआ पत्थर के लगभग 45 फुट लंबे प्रस्तरखंड का बना हुआ है। इन सिंहों के नीचे एक पट्टी पर चारों दिशाओं में चक्र बने हुए हैं, इन चक्रों में 32 तीलियां हैं। इन्हीं तीलियों को धर्म, चक्र, प्रवर्तन का प्रतीक माना जाता है।
इनका कहना है
नगर के प्रतिष्ठित लोगों की सहमति से और शासन से अनुमति लेकर उमरियापान में स्थापित अशोक स्तंभ के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। 26 जनवरी से पहले नए आकार का अशोक स्तंभ पुन: स्थापित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
-अटल ब्यौहार, सरपंच उमरियापान

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