एक तरफ 4400 करोड़ की रफ्तार, दूसरी तरफ 41 साल पुराने जख्मों पर मरहम की तैयारी

एक तरफ 4400 करोड़ की रफ्तार, दूसरी तरफ 41 साल पुराने जख्मों पर मरहम की तैयारी
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश के लिए आज का दिन दो महत्वपूर्ण वजहों से चर्चा में है। एक ओर जहाँ विदिशा में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर भोपाल में दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के अवशेषों और प्रभावितों के भविष्य को लेकर बड़ी हलचल शुरू हुई है।
1. विदिशा: सड़कों का जाल और सुरक्षित सफर की सौगात
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज विदिशा में ₹4,400 करोड़ की लागत वाली 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। 1,041 करोड़ की लागत से भोपाल-विदिशा खंड को 4-लेन किया जा रहा है, जिससे सांची के बौद्ध स्तूपों तक पहुंचना आसान होगा। रातापानी अभ्यारण्य में बाघों की सुरक्षा के लिए साउंड-प्रूफ कॉरिडोर और एनिमल अंडरपास का मॉडल पेश किया गया। वही हादसों को रोकने के लिए 5 नए अंडरपास और आधुनिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई।
2. भोपाल: यूनियन कार्बाइड की 85 एकड़ जमीन का होगा कायाकल्प?
विकास की घोषणाओं के बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के निरीक्षण पर पहुंचे। यह दौरा 41 साल पुरानी गैस त्रासदी के पीड़ितों और फैक्ट्री की जमीन के भविष्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैक्ट्री की करीब 85 एकड़ जमीन के भविष्य को लेकर मंथन शुरू हो गया है। जहाँ पुलिस विभाग ने DRP लाइन के लिए जमीन मांगी है, वहीं प्रशासन फाइलों को खंगालने में जुटा है। पीड़ित संगठनों ने 11 साल से बंद पड़ी राज्य स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक शुरू करने और महिलाओं की रुकी हुई पेंशन का मुद्दा उठाया है। हालांकि पिछले साल 337 टन कचरा पीथमपुर भेजा गया था, लेकिन संगठनों का दावा है कि जमीन के अंदर अब भी हजारों टन कचरा दफन है, जो 42 बस्तियों के पानी को जहरीला बना रहा है।







