नियमों के मुताबिक खर्च, रिपोर्ट व ऑडिट समय पर कुलपति बोले, योजना बंद होने के बाद भी ट्रेनिंग जारी
पंचगव्य परियोजना पर घोटाले के आरोपों के बीच वेटेरनरी विश्वविद्यालय की सफाई

जबलपुर,यशभारत । नानाजी देशमुख पशु-चिकित्सा विश्वविद्यालय में 3.50 करोड़ की पंचगव्य परियोजना को लेकर उठे घोटाले के आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। विश्वविद्यालय के अनुसार “Establishment of Indigenous Cattle Research Centre for Development of Panchgavya Products” परियोजना वर्ष 2012 में 3.50 करोड़ की स्वीकृति के साथ आरकेवीवाई द्वारा मंजूर की गई थी। परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. वाई.पी. साहनी रहे।
विश्वविद्यालय का दावा है कि गोबर–गोमूत्र से उत्पाद निर्माण और स्वदेशी बनाम संकर गोवंश के तुलनात्मक अध्ययन दोनों उद्देश्य पूरे किए गए और पूर्ण रिपोर्ट वित्तपोषण एजेंसी को भेजी गई। उपकरण, वाहन खरीद, यात्रा व्यय और अन्य खर्च स्वीकृत डीपीआर और शासन नियमों के अनुसार किए गए। सभी देयक ऑडिट एवं उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत किए गए, साथ ही हर वर्ष प्रगति प्रतिवेदन भी भेजा गया। विश्वविद्यालय के मुताबिक एजेंसी ने अब तक कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है।
कुलपति मनदीप शर्मा ने कहा कि परियोजना 2018 में नियमानुसार बंद हो गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय अब भी बिना फंडिंग किसानों और पशुपालकों को प्रशिक्षण दे रहा है। जांच समिति को सभी दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं, हालांकि अब तक उसकी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुई है।







