भोपाल का ईरानी डेरा पुलिस के चक्रव्यूह में: 6 राज्यों की फोर्स ने डाला पड़ाव, राजू ईरानी समेत 5 की तलाश तेज

भोपाल का ईरानी डेरा पुलिस के चक्रव्यूह में: 6 राज्यों की फोर्स ने डाला पड़ाव, राजू ईरानी समेत 5 की तलाश तेज
अमन कॉलोनी में प्रशासन का सर्वे शुरू, अवैध निर्माणों पर चल सकता है बुलडोजर; अपराधियों को पनाह देने वालों का बनेगा डेटाबेस
भोपाल, यशभारत। राजधानी भोपाल का कुख्यात ईरानी डेरा (अमन कॉलोनी) एक बार फिर सुर्खियों में है। गिरोह के सरगना राजू ईरानी और उसके पांच साथियों की तलाश में अब देश के 6 राज्यों की पुलिस ने भोपाल में डेरा डाल दिया है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि उनके उस देशव्यापी नेटवर्क को ध्वस्त करना है जो वारदातों के बाद उन्हें संरक्षण देता है।
अंतर्राज्यीय नेटवर्क पर पुलिस का प्रहार
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ईरानी गैंग का नेटवर्क मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। गिरोह के सदस्य वारदात के बाद नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में फरारी काटते हैं। वहीं, दूसरे राज्यों के अपराधी भी वारदात के बाद भोपाल की अमन कॉलोनी में आकर छिप जाते हैं। पुलिस अब इन सभी मददगारों और रिश्तेदारों का एक विस्तृत डेटा तैयार कर रही है ताकि अपराधियों के छिपने के रास्ते बंद किए जा सकें।
सफर पर निकलते हैं अपराधी, माल पहुंचाने के लिए बैकअप टीम
ईरानी गैंग के काम करने का तरीका किसी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर जैसा है। गैंग के सदस्य चोरी, लूट और ठगी के लिए महीनों तक अपने कबीले से दूर रहते हैं, जिसे वे सफर कहते हैं। गैंग के साथ दो सदस्य ऐसे होते हैं जो सीधे वारदात में शामिल नहीं होते। उनका काम केवल चोरी के माल को लग्जरी कारों या बाइक के जरिए सुरक्षित डेरे तक पहुंचाना होता है। फिलहाल पुलिस को राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब और सबदर की तलाश है, जो पुलिस की सख्ती के बाद से ही भूमिगत हैं।
प्रशासन की बुलडोजर तैयारी
सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और नगर निगम भी अब एक्शन मोड में हैं। अमन कॉलोनी स्थित डेरे की जमीन के कागजात खंगाले जा रहे हैं। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा मकानों की जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो नियमों के विरुद्ध बने मकानों पर जल्द ही प्रशासन का बुलडोजर चल सकता है।
2014 के संघर्ष से सुर्खियों में आया था इलाका
अमन कॉलोनी का यह हिस्सा पहली बार 2014 में चर्चा में आया था जब शिया और सुन्नी समुदाय के बीच इमामबाड़े की जमीन को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। उस दौरान करीब 39 घरों में आगजनी हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। तब से ही यह इलाका पुलिस के लिए संवदेनशील बना हुआ है।







