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इंस्पेक्टर सिंधु 4 लाख रुपये के बंडल सहित गिरफ्तार, कफ सिरप कांड से कनेक्शन

कौन हैं रमेश सिंह सिंधु?

इंस्पेक्टर सिंधु 4 लाख रुपये के बंडल सहित गिरफ्तार, कफ सिरप कांड से कनेक्शन

क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को साढ़े तीन करोड़ के कफ सिरप तस्करी केस में जमानती से चार लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

inspector ramesh singh sindhu

 गाजियाबाद। देश की राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद में पुलिस ने पिछले दिनों करीब साढ़े तीन करोड रुपए की अवैध कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का खुलासा किया था। लेकिन, इस खुलासे के महज 17 दिन बाद ही पुलिस महकमे को अब उसी मामले में खुद शर्मसार होना पड़ा है। दरअसल, गुरुवार देर रात क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को इस मामले में चार लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। इंस्पेक्टर पर यह कार्रवाई खुद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के शख्स निर्देश पर हुई।

आपके बता दें कि 3 नवंबर को मेरठ रोड इंडस्ट्रियल एरिया में क्राइम ब्रांच ने भारी मात्रा में नशीली कफ सिरप की खेप पकड़ी थी। इस केस में गिरफ्तार मुख्य आरोपी की जमानत के लिए जमानती संतोष सिंह सामने आए थे। जांच में खुलासा हुआ कि इंस्पेक्टर सिंधु ने जमानत सत्यापन रिपोर्ट को साफ-सुथरा दिखाने और जमानती को किसी भी कानूनी पचड़े में ना फंसने देने की एवज में चार लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी।शिकायत मिलते ही एडीसीपी क्राइम पीयूष कुमार सिंह ने इंस्पेक्टर को रंगे हाथों पकड़ने की पूरी रणनीति तैयार की। गुरुवार की रात करीब 11 बजे क्राइम ब्रांच ऑफिस के अंदर ही ट्रैप टीम ने छापा मारा। इंस्पेक्टर की सर्विस कार की तलाशी ली गई तो डिक्की में छिपाकर रखे गए चार लाख रुपए के बंडल मिले। इसके बाद मौके पर ही सिंधु को हिरासत में ले लिया गया। डीपी सिटी धवल जायसवाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु के खिलाफ सिहानी गेट थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। पूछताछ में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

कौन हैं रमेश सिंह सिंधु?

इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए एडीसीपी क्राइम पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु की तैनाती लंबे समय से क्राइम ब्रांच में
थी। इससे पहले वह गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में नियुक्त थे। करीब ढाई-तीन पहले उनका ट्रांसफर क्राइम ब्रांच में कर दिया गया और इसके बाद से ही वह इसी विभाग में नियुक्त थे।

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