बदलते परिवेश के बीच नए रूप में उभर रहा है बचपन
आज बाल दिवस पर विशेष राजेश शर्मा राजू

जबलपुर यशभारत। “बच्चे मन के सच्चे, सारे जग की आंख के तारे”—हर वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस इसी भाव को पुनः जीवंत करता है। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर मनाया जाने वाला यह दिवस बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा, संवेदनाओं और खुशहाल भविष्य को समर्पित है।
आज जब देशभर के स्कूलों में रंग-बिरंगे कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और हँसी-खुशी का माहौल दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज बदलते दौर में बचपन के बदलते स्वरूप को भी गंभीरता से महसूस कर रहा है।
बचपन की चुनौतियाँ बढ़ीं
डिजिटल दुनिया के विस्तार ने बच्चों के सीखने के तरीके, खेलने की आदतें और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित किया है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहाँ उनके ज्ञान की दुनिया को व्यापक बनाया है, वहीं ऑनलाइन लत, साइबर जोखिम और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज का बचपन पहले की तुलना में अधिक जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम है, लेकिन वह भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर अधिक दबाव झेल रहा है पढ़ाई और प्रतियोगिता का बढ़ता दवाब बाहर खेलने के अवसरों में कमी पारिवारिक समय में कमी डिजिटल निर्भरता में वृद्धि है
स्कूलों में रंगारंग कार्यक्रम
शहर के विभिन्न स्कूलों में बाल दिवस पर बच्चों के लिए विशेष आयोजन किए गए। शिक्षकों ने छात्रों के लिए खेल, क्विज़, नृत्य, चित्रकला, पोशाक प्रतियोगिता और झूले-मस्ती से भरे कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर शिक्षकों ने छात्रों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे बच्चे बेहद उत्साहित दिखाई दिए।
समाज को याद दिलाने का अवसर है बाल दिवस
बाल अधिकारों पर काम कर रहे सामाजिक संगठनों का कहना है कि बच्चों को केवल एक दिन तक सीमित उत्सव नहीं चाहिए, बल्कि सुरक्षित वातावरण,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,नशा व हिंसा से मुक्त माहौल,खेल और रचनात्मकता को बढ़ावा,मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान इन सब की निरंतर आवश्यकता है।
नेहरू जी का संदेश आज भी प्रासंगिक
पंडित नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। उनका कहना था—
“आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे।”
वर्तमान समय में यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि तेज़ी से बदलती दुनिया बच्चों के सर्वांगीण विकास की माँग पहले से अधिक कर रही है।






