फर्जी वेतन पर लगाम: मप्र नगरीय प्रशासन में AI-ML से करोड़ों की बचत; 5000 से अधिक कर्मचारियों पर गिरी गाज

फर्जी वेतन पर लगाम: मप्र नगरीय प्रशासन में AI-ML से करोड़ों की बचत; 5000 से अधिक कर्मचारियों पर गिरी गाज
भोपाल,यशभारत। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था में क्रांति लाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पर आधारित फेस आईडी उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) लागू की है, जिसका असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। इस अत्याधुनिक तकनीक के कारण फर्जी वेतन भुगतान पर पूर्ण विराम लग गया है, जिससे नगरीय निकायों को करोड़ों रुपये की सीधी वित्तीय बचत हुई है।
डेटा की सच्चाई: 1.54 लाख में से 5000 से ज़्यादा फर्जी
विभाग द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सभी नगरीय निकायों में अब तक 1,54,767 कर्मचारियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इनमें से 1.25 लाख से अधिक कर्मचारी रोज़ाना फेस आईडी से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जिससे उपस्थिति और कार्य निष्पादन का डेटा रीयल-टाइम में सत्यापित हो रहा है।
आयुक्त नगरीय प्रशासन, संकेत भोंडवे ने कहा,”यह प्रणाली नगरीय निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने का एक ठोस कदम है। फर्जी वेतन भुगतान पर नियंत्रण से वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हुआ है।” सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि इस डिजिटल निगरानी के कारण 5000 से अधिक कर्मचारियों को अनुपस्थित या फर्जी उपस्थिति के दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
ड्राइवरों के विरोध के बीच डीजल चोरी पर भी शिकंजा
फेस आईडी प्रणाली का प्रभाव केवल वेतन तक सीमित नहीं रहा है। इसमें शामिल जियो-फेंसिंग (Ring Fence) तंत्र के कारण अब विभागों के वाहनों की मूवमेंट पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस कदम से डीजल की चोरी और वाहनों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। सूत्रों के अनुसार, डीज़ल चोरी और अनियमितताओं पर रोक लगने के कारण नगरीय निकाय दल के कुछ ड्राइवर वर्गों द्वारा इस व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है।
E-HRMS की नींव तैयार
विभाग ने यह भी बताया है कि यह फेस आईडी प्रणाली अब भविष्य के E-HRMS (Electronic Human Resource Management System) के लिए आधार (Backbone) का काम करेगी। इससे कर्मचारी प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा।







