कटनीमध्य प्रदेश

यशभारत-संडे स्पेशल खतरे में ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व, सदियों पुराने इतिहास को संजोए बिलहरी, गुप्तकाल की वास्तुकला, कलचुरी राजवंश की गौरव गाथा और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की वीरता का जीवंत दस्तावेज

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कटनी, यशभारत। खनिज संपदा से भरपूर कटनी जिला संगमरमर की खदानों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है तो वहीं दूसरी तरफ बिल्हरी एक ऐसा कस्बा है, जो इतिहास और पौराणिक कथाओं का अनमोल खजाना समेटे हुए है। पुष्पावती नगरी बिलहरी में 45 मंदिर और 13 बावडिय़ां हैं, जो सदियों पुराने इतिहास को संजोए हुए हैं। जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर बहोरीबंद तहसील में बसा यह प्राचीन स्थल, जिसे पुष्पावती नगरी के नाम से जाना जाता था। 85 मंदिरों और 13 बावडिय़ों की उपस्थिति के साथ अपनी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। 945 ईस्वी से जुड़ा यह क्षेत्र गुप्त काल की वास्तुकला, कलचुरी राजवंश की गौरव गाथा, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की वीरता और विष्णु पुराण की कथाओं का जीवंत दस्तावेज है। बिल्हारी न केवल जैन तीर्थयात्रियों के लिए पवित्र स्थल है, बल्कि हिंदू भक्तों और इतिहास प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। इस लेख में हम बिल्हारी के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को गहराई से जानेंगे, जो इसे मध्य भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल रत्न बनाता है।
गुप्त काल से स्वतंत्रता संग्राम तक का गौरवशाली सफर
बिलहरी का इतिहास प्राचीन भारत की सांस्कृतिक और राजनैतिक उथल-पुथल का साक्षी रहा है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार यह क्षेत्र गुप्त साम्राज्य 4वीं-5वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान एक महत्वपूर्ण केंद्र था। बिल्हारी के प्राचीन मंदिरों और बावडिय़ों के खंडहर, जो ब्रिटिश काल के खोजकर्ताओं द्वारा वर्णित किए गए, गुप्तकालीन स्थापत्य कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। यहां पाए गए ईंटों से निर्मित मंदिरों के अवशेषों में भगवान विष्णु, बलराम, सरस्वती और चार भुजाओं वाली विष्णु प्रतिमाएं शामिल हैं, जो नक्काशी की बारीकियों और गुप्त काल की धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक हैं। ये मूर्तियां आज भी क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि की गवाही देती हैं।
गुप्तकालीन मंदिरों में उकेरी गई तस्वीर
बिलहरी के गुप्तकालीन मंदिर खंडहरों में उकेरी गई विष्णु और सरस्वती की प्राचीन मूर्तियां, जो पत्थरों पर उत्कीर्ण कला का उत्कृष्ट नमूना हैं। बिलहरी का किला, जो 945 ईस्वी में कलचुरी राजवंश के अधीन निर्मित हुआ है, इस क्षेत्र की रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। यह किला न केवल अभेद्य था, बल्कि मध्यकाल में व्यापारिक मार्गों का केंद्र भी रहा, जो कटनी को बुंदेलखंड और बाघेलखंड से जोड़ता था। पुरातात्विक सर्वेक्षणों में यहां ब्राह्मी लिपि में शिलालेख और प्राचीन जल संरचनाएं मिली हैंए जो बिल्हारी को प्राचीन भारत के व्यापार और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण गढ़ सिद्ध करती हैं।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख
बिलहरी का ऐतिहासिक महत्व 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी उजागर हुआ। पन्ना के रघुनाथ सिंह बुंदेला के नेतृत्व में विद्रोहियों ने बिल्हारी किले पर कब्जा कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी। हालांकिए ब्रिटिश सेना ने जबलपुर और नागौद से सैनिक भेजकर किले को पुन: अपने नियंत्रण में ले लिया, लेकिन यह घटना बिलहरी की वीरता और देशभक्ति की अमर कहानी बन गई। आज मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित बिलहरी का स्टोन पार्क पर्यटकों के लिए एक अनूठा आकर्षण है, जहां प्राचीन शिलाएं, मूर्तियां और नक्काशियां प्रदर्शित की जाती हैं।
जैन और हिंदू परंपराओं का संगम
यह स्थल जैन और हिंदू परंपराओं का संगम होने के साथ.साथ आदिवासी संस्कृति के प्रभाव को भी दर्शाता है। बिलहरी का इतिहास राजवंशीय गौरव, व्यापारिक समृद्धि और स्वतंत्रता संग्राम की वीरता का एक जीवंत दर्पण है, जो इसे इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए विशेष बनाता है।
पुष्पावती नगरी और विष्णु के अवतारों की भूमि
पौराणिक दृष्टिकोण से बिलहरी को विष्णु पुराण में वर्णित पुष्पावती नगरी के रूप में जाना जाता है, जो भगवान विष्णु की भक्ति और उनके दशावतारों की कथाओं का केंद्र रही है।
भगवान विष्णु से जुड़ा है रहस्य
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार यह क्षेत्र विशेष रूप से विष्णु के वराह अवतार से जुड़ा है, जिसमें भगवान विष्णु ने पृथ्वी को राक्षस हिरण्याक्ष से मुक्त कराया था। बिलहरी के मंदिरों और जलाशयों के पास पाए गए शिलालेखों में दशावतारों जैसे मत्स्य, कूर्म, वराह और नरसिंह की नक्काशियां इस पौराणिक महत्व को और गहरा करती हैं। यहां चित्र का उल्लेख बिलहरी की प्राचीन बावड़ी के निकट उत्कीर्ण विष्णु के दशावतारों की शिलाए जो पौराणिक कथाओं को जीवंत करती है।
जैन मंदिर आस्था का केंद्र
बिलहरी का पौराणिक महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। यह जैन धर्म के लिए भी एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहां तीर्थकर पाश्र्वनाथ को समर्पित मंदिर जैन समुदाय के लिए आस्था का केंद्र है। पाश्र्वनाथ की विशाल प्रतिमाएं जो अहिंसाए सत्य और तपस्या के जैन सिद्धांतों को दर्शाती है, श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। स्कंद पुराण और भागवत पुराण में वर्णित बिल्हारी की बावडिय़ां और जलाशय पाप.मुक्ति के प्रतीक माने जाते हैं, जहां श्रद्धालु स्नान कर आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त करते हैं। स्थानीय कथाओं में यह भी प्रचलित है कि बिलहरी रामायण और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र की यात्रा की थी और यहां के कुछ कुंड और मंदिर रामायण कालीन कथाओं से प्रेरित हैं। भगवान शिव की तपस्या और विष्णु की शयन मुद्रा नारायण शयन से संबंधित कथाएं बिल्हारी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती हैं।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
यह स्थान धर्मए नैतिकता और कर्म के पुराणिक सिद्धांतों को जीवंत करता हैए जो आधुनिक युग में भी प्रासंगिक हैं। पर्यटन और संरक्षण की चुनौतियां बिलहरी का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व इसे पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल बनाता है, लेकिन शहरीकरण और रखरखाव की कमी इसकी धरोहरों को खतरे में डाल रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और पुरातत्व विभाग ने बिल्हारी के मंदिरों, बावडिय़ों और किले को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें स्टोन पार्क की स्थापना और पर्यटक सुविधाओं का विकास शामिल है। फिर भी स्थानीय समुदाय और प्रशासन को मिलकर इस क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों को और बेहतर ढंग से संरक्षित करने की आवश्यकता है। बिलहरी की यात्रा न केवल इतिहास और आस्था की खोज है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने का अवसर भी है।
नदी का किनारा और शांत वातावरण
यहां के आसपास के हरे-भरे जंगल, कटनी नदी का किनारा और शांत वातावरण इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं। पर्यटकों के लिए सुझाव है कि वे बिल्हारी के मंदिरों और बावडिय़ों की सैर के साथ ही स्थानीय आदिवासी संस्कृति और हस्तशिल्प को भी देखेंए जो इस क्षेत्र की विविधता को और समृद्ध करते हैं। कटनी जिले का बिलहरी इतिहास और पौराणिक कथाओं का एक ऐसा संगम है।
गुप्त काल की नक्काशी
जो इसे पुष्पावती नगरी का जीवंत अवशेष बनाता है। गुप्त काल की नक्काशीदार मूर्तियों से लेकर 1857 की क्रांति की वीर गाथाओं तक और विष्णु पुराण की कथाओं से जैन तीर्थ तक यह स्थान हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देता है। बिलहरी की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा आपको समय की सैर पर ले जाएगी, जहां प्राचीन भारत की कहानियां जीवंत हो उठती हैं।
हमारी संस्कृति हमारी विरासत का प्रतीक
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संरक्षित यह स्थल हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यदि आप कटनी की यात्रा पर हैं, तो बिल्हारी को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। यह स्थान सिद्ध करता है कि इतिहास और पुराण कभी पुराने नहीं होते, वे हमेशा हमें प्रेरित करते रहते हैं।

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