जबलपुरमध्य प्रदेश

धान की फसलों में रोग का प्रकोप किसानों पर मंडराया संकट

फफूंद बीमारी से किसान परेशान

जबलपुर यशभारत। धान की फसल में सीट ब्लास्ट रोग लग जाने के कारण धान की खेती करने वाले किसानों में एक बार पित्र से संकट मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि इस रोग से धान की पैदावार में काफी गिरावट की संभावना हैं। बता दें कि खेतों में मेहनत से खड़ी यह पसल अब किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है। जिले के कई ग्रामों में सीट ब्लास्ट जैसा रोग लग जाने के कारण वहां पर लगी धान की पसल सुख कर पराली बन गई। इस रोग ने पसलों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। धान के पौधों की पत्तियाँ जलने जैसी दिख रही हैं, वहीं कई खेतों में पूरी पसल सूखकर पराली में तब्दील हो रही है। किसानों की महीनों की मेहनत अब मौसम और बीमारी के दोहरे हमले की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी

धान की खेती करने वाले महेश राजपूत सत्यम सिंह | पुष्पांशु ठाकुर अरुण सिंह सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि कुछ ही दिनों में पूरी फसल पर यह बीमारी फैल गई है। पहले पत्तों पर भूरे धब्बे दिखे, फिर देखते-देखते पौधे झुलस गए। जिन खेतों में पानी की निकासी सही नहीं थी, वहां यह रोग और तेजी से फैला। किसानों का कहना है कि उन्होंने दवा का छिड़काव भी किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। अब खेतों में खड़ी धान धीरे-धीरे सूख रही है।

पैदावार में आएगी गिरावट

धान की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि अगर यह बीमारी ऐसे ही फैलती रही तो धान की पैदावार में काफी गिरावट आयेगी। किसानों का यह भी कहना है कि इस बार लागत पहले से दोगुनी रही खाद, बीज, मजदूरी सब महंगे हुए, और अब फसल की हालत देखकर मन टूट गया है।

फफूंद बीमारी से किसान परेशान

वहीं इस संबंध जानकारों ने बताया का सिट ब्लास्ट एक फ्यूंद जनित बीमारी है जो नमी और उच्च तापमान में तेजी से फैलती है। इसके नियंत्रण के लिए खेतों में संतुलित उर्वरक उपयोग और रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटाना जरूरी है। समय पर छिड़काव से कुछ हद तक बचाव संभव है, लेकिन जिन खेतों में रोग फैल चुका है, वहां नुकसान रोकना मुश्किल है।

कृषि अधिकारियों द्वारा सलाह की आवश्यकता

किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही कृषि विभाग द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता नहीं दी गई तो आने वाले दिनों में अनाज उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा। कई किसानों की फ्सल लगभग 60 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है। खेतों में झुलस रही यह फसल किसानों की आंखों में नमी छोड़ रही है।

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