भोपाल

अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन रक्षक होता है सीपीआर’ – डॉ. मनीष शर्मा

अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन रक्षक होता है सीपीआर’ – डॉ. मनीष शर्मा
सीपीआर सप्ताह के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
भोपाल यशभारत। आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल जीवन रक्षक सहायता देने के लिए कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी जागरूकता के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में 13 से 17 अक्टूबर तक ‘सीपीआर सप्ताह’ मनाया जा रहा है। इसके तहत, चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसर्स, पैरामेडिकल स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण, सीपीआर शपथ, पोस्टर प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल, डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सीपीआर एक जीवनरक्षक तकनीक है जो हृदय गति रुकने पर मस्तिष्क और महत्वपूर्ण अंगों में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सही तकनीक से दिया हुआ सीपीआर मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन रक्षक होता है।
लाइव डेमोंस्ट्रेशन और प्रशिक्षण:
जयप्रकाश जिला चिकित्सालय में आयोजित उन्मुखीकरण प्रशिक्षण में डॉ. सत्यजीत सिंह ने मैनिक्विन के माध्यम से सीपीआर प्रक्रिया का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया। उन्होंने बताया कि अचानक बेहोश होने की स्थिति में, व्यक्ति की धड़कनों की जांच कर पल्स चालू न होने पर सीपीआर देना जरूरी है।
सीपीआर की आवश्यक तकनीकें:
मरीज को साफ और सपाट जगह पर लेटाकर सीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ ही 108 एंबुलेंस को तुरंत कॉल किया जाना आवश्यक है।
सीपीआर के दौरान छाती के बीचों बीच 1 मिनट में कम से कम 100 से 120 बार दबाव दिया जाता है।
यह दबाव घुटनों पर बैठकर कोहनी सीधी रखकर दिया जाए और कम से कम 5 सेंटीमीटर तक गहरा होना चाहिए।
30 बार तेजी से दबाव देने के बाद 2 बार मुंह से सांस (रेस्क्यू ब्रेथ) भी दी जानी चाहिए।
यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जानी जरूरी है जब तक मरीज की स्वाभाविक सांसें न लौट आएं या चिकित्सकीय सहायता न मिल जाए।
जीवनरक्षक महत्व:
विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक दिल की धड़कन रुक जाने पर कुछ ही मिनट में ब्रेन डैमेज हो सकता है। शुरुआती हर मिनट व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना को 10% तक कम कर देता है। अनुमान है कि लगभग 70% हृदय गति रुकने की घटनाएँ अस्पतालों के बाहर होती हैं, जहां तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती। सीपीआर देकर व्यक्ति की जीवित बचने की संभावनाओं को दो से तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
आयुष्मान आरोग्य मन्दिरों में भी ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की स्थिति के आंकलन एवं सीपीआर तकनीक के बारे में जानकारी दी जा रही है।

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