दीवाली से पहले खरीदी का महामुहूर्त, पुष्य नक्षत्र में बन रहा मंगल-बुध का दुर्लभ संयोग, सिद्ध और साध्य योग में 14-15 अक्टूबर को होगी जमकर खरीदी, बाजार में चहल-पहल, खरीदी को लेकर व्यापारियों में उत्साह

कटनी, यशभारत। रोशनी के महापर्व दीपावली को अब ज्यादा समय नहीं रह गया है। शुक्रवार को करवाचौथ के बाद पर्व की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। दीपोत्सव के इस पांच दिवसीय महापर्व की शुरूआत 18 अक्टूबर को धनतेरस के साथ होगी और दूसरे दिन 19 अक्टूबर को नरक चौदस एवं 20 अक्टूबर को दीवाली मनाई जाएगी। पर्व को लेकर शहर के बाजारों में अभी से चहल-पहल देखी जा रही है। आर्थिक मंदी के बावजूद शहर के व्यापारी अच्छे कारोबार की उम्मीद लगाए हुए हैं, लिहाजा व्यापारियों ने अपने स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी है।
दीपावली के पहले खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र दो दिन तक सौभाग्य की वर्षा करेगा। 14-15 अक्टूबर को मंगल-पुष्य और बुध-पुष्य संयोग है। यह संयोग भूमि, भवन, वाहन, स्वर्ण, रजत और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीदी के लिए शुभ रहेगा। पंडित रामभूषण तिवारी काजू महाराज के अनुसार शुभ योग मंगलवार सुबह 11.10 बजे शुरू होकर बुधवार दोपहर 12.30 तक रहेगा। बुध-पुष्य 15 को दोपहर 12.30 तक रहेगा। सोने-चांदी, आभूषण, बही-खाते, कलम, कंप्यूटर अन्य व्यावसायिक वस्तुओं की खरीदी के लिए अत्यंत शुभ होता है। पुष्य नक्षत्र को लेकर व्यापारियों में उत्साह देखा जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदी शुभ होती है।
दीपावली के लिए खुशियों की खरीदी
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 14-15 अक्टूबर को खरीदी का महामुहूर्त है। इस दिन दीपावली के लिए खुशियों की खरीदी की जाएगी। मान्यता के अनुसार गुरु पुष्य नक्षत्र में हर प्रकार की वस्तु खरीदना शुभ है। इस दिन खरीदी गई वस्तु घर में स्थायी समृद्धि प्रदान करती है।, इसलिए नक्षत्र विशेष की साक्षी में सुबह से रात तक खरीदी करना विशेष शुभ रहेगा। 27 नक्षत्रों में पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। दीपावली से पहले इस नक्षत्र का आना सर्वत्र शुभता का प्रतीक माना गया है। शास्त्र में गुरु पुष्य नक्षत्र को महामुहूर्त माना गया है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि और उपस्वामी बृहस्पति है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का विशेष महत्व माना गया है।
इन सामग्री की कर सकते हैं खरीदी
गुरु से संबंधित वस्तुओं जैसे सोना, बही-खाता, नई पॉलिसी, बैंक में एफडी, नए रेस्टोरेंट, मंडी के सौदे, धान, खाद, बीज का व्यवसाय, पशुओं का आयात, धार्मिक वस्तुएं, रत्न आदि की खरीदी इस योग में लाभदायक होती है। शनि से संबंधित क्षेत्र वाहन, इलेक्ट्रिकल आइटम, बर्तन, कारखाना, नई फैक्ट्री, दुकान, वस्त्र, फर्नीचर क्षेत्रों में निवेश शुभ है। इस बार शनि-बृहस्पति का केंद्र-त्रिकोण योग शुभ रहेगा।
व्यापारियों को बड़ी उम्मीद
दो दिवसीय पुष्य नक्षत्र को लेकर शहर के प्रमुख बाजारों, विशेषकर सराफा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा बाजार में विशेष तैयारियां की गई हैं। धनतेरस और दीपावली से पहले पड़ रहे इस महामुहूर्त का लाभ उठाने व्यापारियों ने ग्राहकों के लिए ऑफर और नई वैरायटी पेश की है। सराफा व्यापारियों को सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों की जोरदार बिक्री की उम्मीद है, तो वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई गाडिय़ों की बुकिंग में तेजी देखी जा रही है।
नए कार्यों का श्री गणेश शुभ
पुष्य नक्षत्र के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग होने से इस दिन सभी प्रकार के कार्य को सिद्ध माना जाता है। ग्रह नक्षत्र के आधार पर यदि कोई कार्य योजना बना रखी है, तो इस योजना का शुभारंभ इस दिन कर सकते हैं। कोई नया व्यापार या व्यवसाय या प्रतिष्ठान के प्रमुख स्थापना या शुरुआत करनी है, तो इस दिन का लाभ लिया जा सकता है।
एक नजर इधर भी
1. स्वर्ण आभूषण, लोहे के उत्पाद या वाहनों आदि सामग्री का संचय कर सकते हैं।
2. वस्त्र एवं बैंकिंग से जुड़ी पॉलिसी खरीदी पुष्य नक्षत्र के दिन खरीदी जा सकती है।
3. पुष्य नक्षत्र के दिन स्थायी संपत्ति की खरीदी की योजना भी बनाई जा सकती है।
4. भूमि, भवन, मकान, दुकान व्यावसायिक प्रतिष्ठान की भी खरीदी जा सकती है।
5. रेस्टोरेंट, टेक्सटाइल मिल्स, इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद इकाई का शुरू कर सकते हैं।







