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महामंत्री पर फंसा पेंच, सूची होल्ड, नेताओं के दबाव के चलते उलझ गए भाजपा की जिला कार्यकारिणी के समीकरण

नाम जोड़ने और कटवाने नए फार्मूले पर चर्चा, सारा मामला प्रदेश नेतृत्व के पाले में

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कटनी, यशभारत। स्थानीय नेताओं द्वारा अपने समर्थकों को पद दिलाने राजधानी भोपाल में बनाए जा रहे दबाव के बीच भाजपा की कटनी जिला कार्यकारिणी होल्ड पर है। खबर है कि जिला महामंत्री पद पर सबसे ज्यादा पेंच फंसा हुआ है। संगठन में महामंत्री के तीन पद हैं, जिसमें जिलाध्यक्ष, सांसद और जिले के विधायक अपने पसंद के नेता की ताजपोशी चाहते हैं। शह और मात के खेल में कुछ फार्मूले भी आजमाए जाने की चर्चा है, जिसको लागू करके कुछ खास नामों कार्यकारिणी में आने से रोका जा सके। इस बीच प्रदेश नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि नेताओं के रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को किसी भी हालत में संगठन में नहीं लिया जाएगा। जिला कार्यकारिणी में जगह पा चुके फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन, संपतिया उइके की बेटी और गिरीश गौतम के बेटे से इस्तीफा लिया जा चुका है। इस निर्णय से जाहिर है कि परिवारवाद तो बिलकुल नहीं चलने दिया जा रहा। इस बात का ध्यान भी कड़ाई से रखा जा रहा है कि किसी भी नेता को एक से अधिक पद न मिलें।

प्रदेश में जिलाध्यक्षों का चुनाव हुए लगभग 9 माह हो चुके हैं, तबसे जिलाध्यक्ष पुरानी कार्यकारिणी से ही काम चला रहे हैं। जिला कार्यसमितियों की घोषणा का क्रम पिछले 10 दिन से चल रहा है, लेकिन अब तक पार्टी के 60 संगठनात्मक जिलों में से अब तक 12 जिलों की जिला कार्यकारिणी घोषित हो पाई है। हमारे राजधानी स्थित सूत्र बताते हैं कि कटनी जिले की कार्यकारिणी को लेकर भोपाल में दो बार बैठक हो चुकी है, जिसमें जबलपुर संभाग की प्रभारी कविता पाटीदार, पर्यवेक्षक रमेश भटेरे और सुजीत जैन की मौजूदगी में नामों पर मंथन हो चुका है। दोनों बैठकों में जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन को भी भोपाल बुला लिया गया। सूत्र बताते हैं कि कटनी में हुई रायशुमारी में जो नाम प्रपत्र में दर्ज होकर भोपाल पहुंचे उनकी पहले लिस्टिंग की गई और फिर इन नामों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पहली बैठक में पर्यवेक्षकों ने अपनी राय से अवगत कराया। इसी बैठक में जिलाध्यक्ष ने भी अपनी पसंद और नापसंद दोनों बता दी। कुछ नामों पर जिलाध्यक्ष ने सीधे तौर पर आपत्ति व्यक्त की है, जबकि कुछ नामों को वे अपनी कार्यकारिणी में लाना चाहते हैं, इसलिए उन नामों की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। उन्होंने जिला उपाध्यक्ष से लेकर महामंत्री और मंत्री पदों के नामों पर अपनी पसंद कविता पाटीदार को बताई।

महामंत्री पर उलझे समीकरण

सूत्र बताते हैं कि महामंत्री पद लिए सबसे ज्यादा पेंच फंसा हुआ है। तीन पदों के लिए कई नाम कतार में है, जिसमें से कुछ नाम जिलाध्यक्ष की ओर से हैं और कुछ विधायकों की ओर से। इन पर सहमति न बन पाने के कारण कटनी की सूची होल्ड पर है। महामंत्री के लिए जो नाम हैं उनमें अश्वनी गौतम, मनीष देव मिश्रा, विजय गुप्ता शामिल हैं। मनीष देव मिश्रा का नाम विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कोटे से आया है। विजय गुप्ता के लिए जिलाध्यक्ष का इंट्रेस्ट है। यदि गुप्ता पर सहमति नहीं बनती तो उनकी ओर से दूसरा नाम रवि खरे का तैयार रखा गया है। अश्वनी गौतम को विधायकों की संयुक्त पसंद बताया जा रहा है, लेकिन एक धड़ा उन्हें किसी भी हालत में महामंत्री बनने से रोकने की कोशिश में है। इस धड़े को संसदीय क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता का साथ भी मिल रहा है, जिन्होंने प्रदेश नेतृत्व के सामने तर्क दिया है कि यदि अश्वनी गौतम महामंत्री बनते हैं तो जिलाध्यक्ष असहज हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि कल से एक फार्मूला भी चर्चा में है कि महामंत्री के तीन पदों में से 2 को क्रमशः महिला और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया जाए तो जिसे रोका जाना है, वह अपने आप रुक जाएगा। महामंत्री के एक सामान्य पद में मनीष देव मिश्रा पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि उनकी पत्नी वसुधा मिश्रा वर्तमान में पार्षद हैं और ढाई साल की विजयराघवगढ़ नगर पंचायत में अध्यक्ष रह चुकी हैं। अगर परिवारवाद पर कड़ाई हुई तो मनीष भी राडार पर आ सकते हैं। महिला कैंडिडेट के रूप में कल अचानक से मेयर प्रीति सूरी के नाम की चर्चा महामंत्री पद के लिए चली। शायद रणनीति के तहत ऐसा नाम उछाला गया है जो कट ही न पाए। हालांकि प्रीति वर्तमान में महापौर हैं, जो बड़ी जिम्मेदारी है। फिर पार्टी की नीति एक व्यक्ति एक पद की भी है।

सारा मामला हाइकमान के जिम्मे

सूत्र बताते हैं कि दो बार की बैठक में अंतिम सूची तय न हो पाने के कारण अब पूरा मामला प्रदेश नेतृत्व के पाले में चला गया है। अब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और प्रदेश प्रभारी इस पर अंतिम निर्णय लेंगे। सांसद, विधायकों और जिलाध्यक्ष के साथ अन्य प्रभावशाली नेताओं को भरोसे में लेकर पार्टी कोई सर्वमान्य हल निकाल सकती है। लेकिन भाजपा की जिला कार्यकारिणी इस बार देखने लायक होगी। किसे अंदर किया जा रहा है और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, इसका इंतजार कार्यकर्ताओं को है।

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