14 सितंबर को इंदौर में संघ प्रमुख मोहन भागवत करेंगे कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटैल द्वारा लिखी पुस्तक परिक्रमा का विमोचन
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव भी शामिल होंगे।

14 सितंबर को इंदौर में संघ प्रमुख मोहन भागवत करेंगे कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटैल द्वारा लिखी पुस्तक परिक्रमा का विमोचन
नई दिल्ली पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की नर्मदा के प्रति आस्था और श्रद्धा अब जीवन-यात्रा साहित्य का हिस्सा बनने जा रही है। प्रहलाद सिंह पटेल ने अपनी नर्मदा परिक्रमाओं को आधार बनाकर एक पुस्तक लिखी है, जिसका नाम है परिक्रमा। इस पुस्तक का विमोचन 14 सितंबर को इंदौर में होगा और इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी स्वयं उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव भी शामिल होंगे।
यह पुस्तक कई मायनों में खास है। मौजूदा मंत्रिमंडल में पटेल पहले मंत्री हैं, जिन्होंने स्वयं का जीवनानुभव और साधना को आधार बनाकर किताब लिखी है। परिक्रमा केवल नर्मदा यात्रा का विवरण भर नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक दर्शन, आत्मिक अनुभव और जीवन-परिवर्तन का जीवंत दस्तावेज है। पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि कैसे नर्मदा परिक्रमा के दौरान उनका जीवन बदलता गया। उनका भोजन, रहन-सहन और सोचने का तरीका किस प्रकार साधारण से अध्यात्म की ओर मुड़ा। इस यात्रा ने उन्हें भीतर से संयम, त्याग और सेवा का भाव सिखाया। यह परिवर्तन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी गहरा है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में भी दिखाई देता है। किताब की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नर्मदा परिक्रमा के दौरान खोंची गई तस्वीरें भी शामिल हैं। ये तस्वीरें पाठकों को सीधे उस यात्रा से जोड़ देंगी और महसूस कराएंगी कि किस प्रकार एक नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और साधना की स्रोत है। विमोचन समारोह इंदौर में एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन की तरह होगा। मोहन भागवत की उपस्थिति इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना देगी। यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं होगा, बल्कि आस्था, अध्यात्म और भारतीय परंपरा के पुनर्प्रतिष्ठा का क्षण होगा। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की कृति का प्रकाशन यूपी के प्रकाशक ने प्रकाशित किया है। पथिक प्रहलाद सिंह पटेल ने इस पुस्तक में नर्मदा परिक्रमा के अलावा यात्रा का महात्म और जीवन में इसका महत्व दर्शाया गया है। श्री प्रहलाद पटेल ने राजनीति के साथ-साथ समाज और संस्कृति से भी गहरा रिश्ता बनाए रखा है। उनका यह प्रयास राजनीति और अध्यात्म के बीच की दूरी को कम करता है। परिक्रमा नर्मदा की तरह ही प्रवाहमान और प्रेरणादायी कृक्ति है, जो आने वाली पीढिय़ों के लिए पथ-प्रदर्शक बन सकती है। अब वही श्रद्धा और अनुभव साहित्यिक धरोहर का रूप लेने जा रहे हैं। इस ग्रंथ में पाठकों को नर्मदा की कल-कल ध्वनि के साथ-साथ साधना की वह गहराई भी महसूस होगी, जो भीतर से मनुष्य को बदल देती है। यह यात्रा उन्हें केवल राजनीतिक नेता से इतर एक साधक और चिंतक के रूप में स्थापित करती है। नर्मदा के तट पर उठे हर कदम ने उन्हें त्याग, धैर्य और सेवा का पाठ पढ़ाया। यही जीवनानुभव बाद में उनके सार्वजनिक जीवन और निर्णयों में परिलक्षित हुआ। इसे देखकर और पढ़कर पाठक स्वयं को उस यात्रा का सहभागी महसूस करेंगे। यह अनुभूति कराएगी कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और जीवन-साधना का अविनाशी स्रोत है।







