
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ़,जबलपुर के एनिमल लवर्स ने निकाला कैंडल मार्च
जबलपुर में एनिमल वेलफेयर बोर्ड की सदस्य और पीपुल पीस फाउंडेशन की अध्यक्ष, अमरजीत कौर, ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ़ अपना विरोध जताया, जिसमें आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने की बात कही गई है। इस पर बुद्धवार को मालवीय चौक पर कैंडल मार्च निकालकर उन्होंने इस फ़ैसले पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की।

जीने का अधिकार छीनना गलत है’
अमरजीत कौर ने कहा कि सड़क पर रहने वाले इन बेज़ुबान जानवरों को जीने का अधिकार न देना बहुत गलत है। उन्होंने हमारी संस्कृति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें इंसान और पशु-पक्षी सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जब इंसान को सड़क पर रहने नहीं दिया जाता, तो क्या इन जानवरों की केयर टेकिंग और फ़्रीडम की लड़ाई वे लोग लड़ेंगे, जो कहते हैं कि उन्होंने 2 साल में ढाई हज़ार कुत्तों को मारकर खाद बना दी? या वे लोग लड़ेंगे जो कहते हैं कि गौ-हत्या कभी बंद नहीं होगी? उन्होंने इस आदेश को हमारे दिल पर एक गहरा आघात बताया और कहा कि वे हमेशा इन बेज़ुबान जानवरों की आवाज़ बनकर खड़ी रहेंगी।

‘सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला वापस ले’
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के खिलाफ़ पूरे जबलपुर के एनिमल लवर्स एक साथ इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश में भी वे इन बेज़ुबानों के लिए खड़े हैं और सुप्रीम कोर्ट से अपना फ़ैसला वापस लेने की मांग करते हैं। अगर फ़ैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया कि क्या इस आदेश के लिए 15000 करोड़ का बजट आवंटित हो चुका है? उन्होंने कहा कि 3.5 लाख कुत्तों को एक जगह रखना बिल्कुल भी प्रैक्टिकल नहीं है और यह सब बातें हवा में हो रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह भी सवाल किया कि जब देश में गड्ढों से 11 लाख से ज़्यादा मौतें हो रही हैं, रेप हो रहे हैं और एजुकेशन सिस्टम बुरी तरह बिगड़ा हुआ है, तब इन सब पर ध्यान न देकर सिर्फ़ कुत्तों पर ध्यान क्यों दिया जा रहा है?

पराग़ दुबे ने भी इस आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि वे सभी एनिमल लवर्स पूरे देश के साथ मिलकर इस फ़ैसले के खिलाफ़ आवाज़ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर यह आदेश रद्द नहीं होता है, तो उनका विरोध जारी रहेगा और वे इसे रद्द करवाकर ही दम लेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बेज़ुबान जानवरों के साथ अन्याय न किया जा सकता है और न ही वे करने देंगे।







