जांच टीम जाने के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि फिर महंगी हुई शराब

जबलपुर यश भारत। शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में संचालित होने वाली शराब दुकानों में एक बार फिर एमआरपी से ज्यादा रेट पर शराब बिकने लगी है। जिसको लेकर आए दिन सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से समाचार भी सामने आ रहे हैं। अभी कुछ समय पहले की बात है कि आबकारी विभाग के मुखिया के द्वारा एक कार्यवाही को लेकर बड़ा हो हल्ला मचा था इसके बाद ऊपर से एक जांच टीम भी आई थी और जांच टीम जाने के बाद एक बार फिर महंगी शराब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में चर्चा का विषय बन गई है। शराब दुकान ठेकेदार और आबकारी अधिकारी कर्मचारियों के बीच हुए विवाद के सामने आने के बाद सुर प्रेमियों को लगा था कि शायद अब दाम नहीं बढ़ेंगे लेकिन हो उल्टा रहा है। विवाद को लेकर ऊपर से आई जांच टीम की रिपोर्ट पर क्या कार्यवाही हुई इसका तो कोई अता पता नहीं है लेकिन जिस तरह से शराब के दामों में बढ़ोतरी नजर आ रही है उसे झलकता है कि कहीं ना कहीं आबकारी साहब को ऊपर से हरी झंडी मिल गई है जिसके कारण एक बार फिर वे अपने पुराने सिस्टम पर लौट आए हैं और इसी का नतीजा है कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक में शराब के दाम बढ़ गए। ऐसा नहीं है कि शराब के दामों में पहली बार वृद्धि हुई हो पूर्व में भी एक बार ऐसा हुआ था जब काफी हो हल्ला मचने के बाद खुद कलेक्टर साहब को आगे आकर गोपनीय तरीके से स्टिंग ऑपरेशन तक करने की आवश्यकता आन पड़ी थी। और इस स्टिंग ऑपरेशन में अनियमिताएं भी सामने आई थी और उन ठेकेदारों के खिलाफ प्रकरण भी बनाए गए थे जो एमआरपी से अधिक मूल्य पर शराब बेच रहे थे। लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी शराब के दामों में बढ़ोतरी चौंकाने वाली है।
फिर इतनी कवायद क्यों
जब शराब महंगे दामों पर ही बिकवानी है तो आबकारी विभाग के द्वारा नए-नए ढोंग क्यों रचे जाते हैं कभी शराब दुकानों में क्यूआर कोड लगाने की कवायद की जाती है तो कभी कहा जाता है कि पोस मशीन के जरिए ही शराब की बिक्री सुनिश्चित की जाएगी जिससे ठेकेदार मनमाने दाम पर शराब नहीं बेज पाएंगे। और कौन सी शराब कितने में बिक रही है इसकी सीधी जानकारी आबकारी विभाग तक रहेगी ऐसे में महंगी शराब का बिकना न केवल सवालों को जन्म देता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि विभाग का मुखिया चाह ले तो असंभव भी संभव है।
4 महीने बीतने को आये रेट लिस्ट तक नहीं लगता पाया विभाग
आबकारी नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि शराब दुकानों में बाकायदा रेट लिस्ट लगी होनी चाहिए लेकिन शहर की शायद ही कोई दुकान ऐसी हो जहां आपको रेट लिस्ट नजर आ जाए। दूसरी कवायदों से बेहतर तो यही होता कि विभाग शराब दुकानों में बाकायदा हिंदी में रेट लिस्ट बनवाकर लगवा देता ताकि लोगों को आसानी से शराब के दामों का पता चल पाता लेकिन नियम तो सिर्फ कागजों पर हैं वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है।








