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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: EOW ने किया बड़े गिरोह का पर्दाफाश

Fraud of crores in Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana: EOW exposed a big gang

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: EOW ने किया बड़े गिरोह का पर्दाफाश

 

ग्वालियर/चंबल संभाग में सक्रिय था संगठित गिरोह, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों से करोड़ों का गबन

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) मध्य प्रदेश ने ग्वालियर/चंबल संभाग में सक्रिय एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों का उपयोग कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था। यह गिरोह जीवित व्यक्तियों को मृत और मृत व्यक्तियों को फिर से मृत दिखाकर बीमा क्लेम हासिल कर रहा था।

EOW को शिकायत मिली थी कि कुछ व्यक्ति संगठित गिरोह बनाकर इस योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं। ग्वालियर इकाई द्वारा की गई जांच में पाया गया कि यह योजना समाज के गरीब और निम्न वर्ग के व्यक्तियों को मात्र ₹436 प्रतिवर्ष के प्रीमियम पर ₹2 लाख का बीमा कवर प्रदान करती है। बीमाधारक की मृत्यु होने पर ₹2 लाख की राशि नॉमिनी के खाते में जमा होती है।

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₹20 करोड़ से अधिक का संदिग्ध भुगतान उजागर

EOW ने ग्वालियर/चंबल संभाग में कार्यरत 8 बीमा कंपनियों से जनवरी 2020 से दिसंबर 2024 तक के उन सभी बीमा क्लेम की जानकारी मांगी, जिनमें ₹2 लाख का भुगतान नॉमिनी के खाते में किया गया था।

प्रारंभिक जांच में, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से 325 प्रकरणों और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से 679 प्रकरणों, यानी कुल 1004 क्लेम प्रकरणों के दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। इन प्रकरणों में लगभग ₹20 करोड़ का भुगतान संदिग्ध पाया गया है। अन्य कंपनियों से जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।

फर्जीवाड़ा का तरीका और गिरफ्तारियां:

ग्वालियर जिले में: मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से प्राप्त 325 बीमा क्लेम में से 5 प्रकरणों की जांच पूरी हो चुकी है। इसमें पाया गया कि नदीम, इरशाद, नसीमा, सिमरन, कृष्णा शंखवार जैसे जीवित व्यक्तियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम, ग्वालियर से बनवाकर प्रत्येक प्रकरण में ₹2-2 लाख के बीमा क्लेम छलपूर्वक प्राप्त किए गए। इस कृत्य के लिए जिग्नेश प्रजापति, दीपमाला मिश्रा, विवेक दुबे (मैक्स लाइफ कर्मचारी) और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं (420, 467, 468, 471, 120बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गिरोह की कार्यप्रणाली: यह संगठित गिरोह, जिसमें जिग्नेश प्रजापति, दीपमाला मिश्रा, विवेक दुबे और अन्य शामिल थे, गरीब और कम पढ़े-लिखे व्यक्तियों को ऋण का लालच देकर या “एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ वर्ल्ड” नामक संस्था से जोड़ने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड जैसे दस्तावेज प्राप्त करता था। फिर नगर निगम, ग्वालियर से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाते थे। क्लेम भुगतान के बाद, नॉमिनी के बैंक अकाउंट पासबुक, एटीएम और चेकबुक पर हस्ताक्षर करवाकर गिरोह खुद अपने पास रख लेता था और एटीएम या चेक के माध्यम से राशि निकाल लेता था।

मुरैना/भिंड जिलों में भी धोखाधड़ी: एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से प्राप्त 679 प्रकरणों में से मुरैना और भिंड जिलों के 5-5 बीमा क्लेम की जांच पूरी हुई है:

जिला मुरैना: अरुण कुशवाह, राजाबेटी, सीमाबाई, कल्याण महौर, सुनीताबाई जैसे मृतक व्यक्तियों को जीवित दिखाकर उनका PMJJBY में पंजीकरण किया गया और फिर से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर ₹2-2 लाख का बीमा क्लेम प्राप्त किया गया। आरोपी मानसिंह कुशवाह, बल्लेश किरार (बीमा एजेंट), प्रदीप कुशवाह, रिंकू सिंह कुशवाह, सगुनी कुशवाह, सूरजराम कुशवाह (पंचायत सचिव) और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जिला भिंड: बलवीर सिंह राठौर, शशी विमल, मंजूबाई, अरविंद (चार मृतक) को जीवित दिखाकर तथा लक्ष्मण श्रीवास (जीवित) का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर ₹2-2 लाख के कुल ₹10 लाख के बीमा क्लेम नॉमिनी या जीवित व्यक्ति की जानकारी के बिना प्राप्त किए गए। आरोपी बालेन्द्र सिंह कुशवाह, सतीश परिहार, निखिल विमल, भोलू सिंह, पंचायत सचिव सूरतराम कुशवाह और अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अपराध विधि (मुरैना/भिंड): इन जिलों में आरोपी, जिनमें कुछ बीमा एजेंट भी शामिल थे, पंचायत सचिवों के साथ मिलकर ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। वे परिजनों से बीमा राशि या सरकारी सहायता के नाम पर मूल दस्तावेज प्राप्त करते थे, मृतक को जीवित दिखाकर उनका बैंक खाता खुलवाते थे, और फिर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराकर बीमा क्लेम हासिल करते थे।

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