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हनुमान जी का सिंदूर बल: एक चुटकी सिंदूर लगाते ही लंका में गरजे पवनपुत्र – हनुमान सिंदूर कथा

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश: भगवान हनुमान, रामायण के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हैं. उन्हें सिंदूर चढ़ाना हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखता है. जहां सिंदूर महिलाओं के लिए सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, वहीं बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी को भी यह अति प्रिय है. इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो सिंदूर को शुभता और शक्ति का प्रतीक बताती हैं. मान्यता है कि भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और बल, बुद्धि, समृद्धि की प्राप्ति होती है.


क्या है सिंदूर का स्वरूप?

छिंदवाड़ा के केसरी नंदन हनुमान मंदिर के पंडित आचार्य अर्पित पांडे ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं और ग्रंथों में से एक श्री ललिता सहस्त्रनामावली के अनुसार, मां अंबिका के स्वरूप का वर्णन इसमें किया गया है, जिनके नेत्र चंद्र, सूर्य और अग्नि के समान हैं. वहीं, सिंदूर को मां शक्ति का प्रतीक माना गया है, जिसका वर्णन शास्त्रों में मिलता है.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बात की जाए तो कुमकुम ट्री के फल से तैयार किया गया सिंदूर बिल्कुल शुद्ध होता है. यह सिंदूर इसके फल के गुच्छे से निकलता है, जो शुरुआत में हरे रंग का होता है, लेकिन पकने के बाद सिंदूरी रंग में आ जाता है.

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महिलाओं के सौभाग्य और शुभता का प्रतीक सिंदूर

महिलाओं के लिए सिंदूर एक महत्वपूर्ण प्रतीक है जो विवाहित महिलाओं की पहचान करता है. इसके अलावा, यह उनके जीवन में सौभाग्य, खुशहाली और समृद्धि भी लाता है. धार्मिक दृष्टिकोण से मान्यता है कि सिंदूर को मां पार्वती का आशीर्वाद भी माना जाता है. सिंदूर लगाने से पति-पत्नी का रिश्ता भी मजबूत होता है. सिंदूर को देवी पार्वती की शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.


बाल ब्रह्मचारी हनुमान का सिंदूर से अनोखा नाता

पंडित आचार्य अर्पित पांडे ने हनुमान जी और सिंदूर के बीच के गहरे संबंध की कथा बताते हुए कहा कि, रामायण ग्रंथ में उल्लेखित है कि जब रावण ने माता सीता का हरण कर उन्हें अशोक वाटिका में रखा था, उसके बाद जब भगवान हनुमान सात समुंदर पार कर अशोक वाटिका में पहुंचे थे, उस वक्त उन्होंने माता सीता से पूछा कि आपने सिंदूर क्यों लगाया हुआ है और इस वाटिका में आपको इससे कैसे शक्ति मिलती है.

तब माता सीता ने हनुमान को बताया कि इस सिंदूर के माध्यम से ही उन्हें शक्ति मिलती है. सिंदूर उन्हें शक्ति प्रदान करता है और यह शक्ति स्वरूप होता है. इसे लगाने से प्रभु श्रीराम को दीर्घायु मिलेगी. माता सीता के इन वचनों को सुनकर भगवान हनुमान ने भी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और माता का आशीर्वाद लेकर पूरी लंका में आग लगा दी. यह घटना हनुमान जी के सिंदूर के प्रति असीम श्रद्धा और उससे जुड़ी शक्ति का प्रमाण है.

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