सिवनी यश भारत:-सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन पीएन-224 को राजस्थान भेजने के लिए सातवे दिन टीम खोजबीन में जुटी रही।कल सुबह बाघिन नजर आई थी और हाथियों से उसे घेरा भी गया, लेकिन कुछ ही पल में वह चकमा देकर बच निकली थी। आज सुबह से सर्चिंग ऑपरेशन चलाया गया जिसके बाद बाघिन को पकड़ने में टीम को सफलता मिल गई है।दरसअल राजस्थान के बाघों का जीन पूल सुधारने के लिए पेंच टाइगर रिजर्व में चलाए जा रहे देश के पहले इंटरस्टेट ट्रांसलोकेशन अंतर्गत बाघिन पीएन-224 को खोजने का सर्चिग अभियान पिछले 7 दिनों से चल रहा था।
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह, राजस्थान के कोटा से आए सीसीएफ वाइल्ड लाइफ सुगनाराम जाट की मौजूदगी में सर्चिग ऑपरेशन चलाया जा रहा था।
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह का कहना है की पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (राजस्थान) के मध्य चल रही अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की कार्यवाही में आज महत्वपूर्ण प्रगति प्राप्त हुई है। एआई-सक्षम कैमरा ट्रैप सिस्टम से प्राप्त मूवमेंट इनपुट्स के आधार पर,क्षेत्रीय टीमों ने संभावित स्थान पर बाघिन की तलाश शुरू की। हाथी दस्तों का उपयोग करते हुए, टीमों ने बाघिन का पता लगाया और उसकी पहचान की पुष्टि की।जिसके बाद,बाघिन को डॉ. अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में एवं डॉक्टर अमित कुमार ओड की उपस्थिति में विशेषीकृत पशु चिकित्सा टीम द्वारा ट्रेंकुलाइज किया गया।
तत्पश्चात उसे स्थापित वन्यजीव प्रोटोकॉल के तहत प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा रेडियो कॉलर पहनाया गया। कॉलर लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाघिन को सावधानीपूर्वक पुनः जागृत किया गया और उसे फिर से जंगल में विचरण हेतु छोड़ दिया गया। अब जबकि रेडियो कॉलर लग चुका है, बाघिन की गति, व्यवहार और समग्र स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए अगले कुछ दिनों तक उसकी गहन निगरानी की जाएगी। इन अवलोकनों के आधार पर, राजस्थान में उसकी परिवहन की आगामी कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह मील का पत्थर अंतरराज्यीय स्थानांतरण प्रयास में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे अत्यधिक वैज्ञानिक गंभीरता और अंतरराज्यीय समन्वय के साथ किया जा रहा है।
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