मध्य प्रदेशराज्य

अतिथि शिक्षक अस्थाई व्यवस्था : मंत्री बोले— “सामाजिक सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी नहीं”

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सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मध्य प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। विधानसभा के बजट सत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के एक लिखित जवाब ने अतिथि शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अतिथि शिक्षकों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के मूड में नहीं है।

यह खुलासा तब हुआ जब सागर संभाग के निवाड़ी (पृथ्वीपुर) से युवा और प्रखर कांग्रेस विधायक नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर ने सदन में अतिथि शिक्षकों के हक की आवाज उठाई। विधायक राठौर ने सवाल (क्रमांक 2279) किया था कि— “क्या स्कूल शिक्षा विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा योजना है? यदि नहीं, तो क्यों?” इस सवाल ने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर प्रहार किया था।

 अतिथि शिक्षक मात्र एक अस्थाई व्यवस्था”

विधायक नितेन्द्र सिंह के तीखे सवाल पर शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने लिखित जवाब देते हुए कहा— “जी नहीं।” उन्होंने तर्क दिया कि अतिथि शिक्षक केवल एक ‘अस्थाई व्यवस्था’ हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासकीय विद्यालयों में जब नियमित शिक्षक का पद रिक्त होता है या कोई शिक्षक अवकाश पर जाता है, तब केवल पठन-पाठन जारी रखने के लिए अतिथि शिक्षक रखे जाते हैं। उनके लिए किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा योजना का कोई प्रावधान नहीं है।

शिक्षा मंत्री के इस ‘रूखे’ जवाब ने प्रदेश के अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो अतिथि शिक्षक पिछले 10-15 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को अपने दम पर चला रहे हैं, क्या उनके प्रति सरकार की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती? ‘अस्थाई व्यवस्था’ का लेबल लगाकर सरकार ने उन्हें बुढ़ापे की लाठी या किसी भी स्वास्थ्य सुरक्षा से पूरी तरह वंचित कर दिया है।

 ‘अतिथि’ तो है, पर सत्कार नहीं 

विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर के इस सवाल ने सरकार के उस दावे की हवा निकाल दी है जिसमें बार-बार अतिथि शिक्षकों के हितों के संरक्षण की बात कही जाती रही है। जब मंत्री खुद सदन में उन्हें केवल ‘स्टॉप-गैप अरेंजमेंट’ (कामचलाऊ व्यवस्था) मान रहे हैं, तो उनके नियमितीकरण या उज्ज्वल भविष्य की बातें बेमानी लगती हैं। अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक संगठन इस “सामाजिक असुरक्षा” के जवाब पर सरकार के खिलाफ क्या रुख अपनाते हैं।

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