सिवनी यश भारत:-सिवनी जिले के पेंच नेशनल पार्क में माँ बाघिन की मौजूदगी में घायल शावक का सफल रेस्क्यू कर बेहतर उपचार के लिए भोपाल भेजा गया है। पेंच बाघ अभयारण्य प्रबंधन ने एक चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
पेंच टाईगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि परीक्षण में पाया गया कि शारीरिक रूप से डिस आर्डर बाघ शावक के छिपे हुए अंग बाहर होने के कारण उसके अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना कम थी। इसे देखते हुए सुझबूझ के साथ बाघ शावक का रेस्क्यू कर उसे वन विहार भोपाल भेज दिया है। 2 नवंबर पर्यटकों ने एक घायल बाघ शावक को देखा था। इसकी सूचना पेंच प्रबंधन को पर्यटकों व गाइड से प्राप्त हुई थी। 3 नवंबर को घायल बाघ शावक को खोजने में रेस्क्यू दल जुट गया था और देर शाम 5:30 बजे घायल बाघ शावक को बाघिन व एक अन्य बाघ शावक के साथ हाथी महावत द्वारा देखा गया। अंधेरा का समय होने के कारण रेस्क्यू की प्रक्रिया को रोक दिया गया। 4 नवंबर की सुबह पुन: हाथी महावतों व कर्माझिरी कोर क्षेत्र के वन कर्मियों ने बाघ शावक को जंगल में खोजना प्रारंभ किया। सुबह 11 बजे पुनः घायल बाघ शावक, बाघिन व अन्य एक बाघ शावक के साथ हाथी महावतों व पर्यटकों द्वारा देखा गया। इस पर वरिष्ठ वन्यप्राणी स्वास्थ अधिकारी अखिलेश मिश्रा के निर्देशन में गठित रेस्क्यू दल, पेंच मोगली अभ्यारण्य अधीक्षक अनिल सोनी व कर्माझिरी परिक्षेत्र अधिकारी शुभम बड़ोनिया सहित स्टाफ मौके पर पहुंचा। सबसे बड़ी चुनौती थी कि बाघिन के रहते बाघ शावक का सुरक्षित रेस्क्यू करना। डॉक्टर अखिलेश मिश्रा ने बाघ शावक को निश्चेतन डार्ट निशाना लगाकर मारा व अन्य हाथियों की मदद से घेराबंदी कर बाघिन व अन्य बाघ शावक को घायल बाघ शावक से दूर हटाया गया। मौके पर रेस्क्यू दल ने बेहोश घायल बाघ शावक को पिंजरे व रेस्क्यू वाहन में रखकर वहां से बाहर लाया गया, जहां डाक्टर मिश्रा ने बाघ शावक को चेतन किया गया। घायल बाघ शावक को इलाज हेतु वन विहार भोपाल भेजा गया है।
नये पर्यटन सत्र की शुरुआत 1 अक्टूबर से हो चुकी है। वर्षाकाल (प्रजनन अवधि) के तीन माह बाद खुले पेंच कोर में लुभावनी सैर-सपाटा करने बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। पेंच नेशनल पार्क में बाघ, तेंदुआ, भेड़िया और जंगली बिल्ली जैसे शिकारी जानवर पाए हैं। इसके अलावा, चीतल, सांभर, गौर, जंगली सूअर, नीलगाय और चार सींगों वाला मृग जैसे कई शाकाहारी जानवर भी यहां हैं। पार्क में पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें मोर भी शामिल हैं।