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सफाई दूत गिद्धों पर संकट : वनों की कटाई और अतिक्रमण प्रमुख कारण

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जबलपुरl जबलपुर परिक्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष गिद्धों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है इस गिरावट के बाद इकोसिस्टम चैन को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है l

  राज्य सरकार के निर्देश पर जबलपुर वन विभाग ने भी गिद्धों की गणना की थी l गणना के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल गिद्धों की संख्या कम पाई गई है।

गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी माना जाता है।ये मृत पशुओं के शवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं।ये खतरनाक रोगों से मनुष्यों की रक्षा करने में मदद करते हैं।

गिद्धों की संख्या में तेजी से गिरावट के कारण 2002 से IUCN रेड लिस्ट में इन्हें ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

सफाई दूत के बारे में रोचक बातें जान लीजिए…

ये पक्षी धूप और हवा गर्म होने के बाद ही उड़ान भर पाते हैं। बाकी समय घोंसले में रहते हैं, इसलिए इनकी गणना सुबह 6 से 9 बजे के बीच ही करनी पड़ती है।

गिद्ध नर्वस किस्म के होते हैं। यदि कोई इनकी तरफ जाता है, तो वे उल्टी कर उसे डराकर रोकने की कोशिश करते हैं।

इनके पेट में अम्ल होता है, जो मरे हुए जानवरों का सड़ा मांस भी पचा देता है। इससे मनुष्यों में बीन्मानी और फसलों में रुकता है।

 गिद्धों की गणना की गई है। जिसमें करीब 70 गिद्ध गणना के दौरान मिले है।2024 में गिद्धों की गणना के दौरान 89 गिद्ध मिले थे, जबकि इस साल इनकी संख्या कम दर्ज की गई।

जबलपुर रेंज के डीएफओ ऋषि दुबे ने बताया कि गिद्ध लगातार विचरण करते रहते हैं, जिससे संख्या में बदलाव होता रहता है।

अवैध कटाई ,अतिक्रमण घातक 

डीएफओ का कहना है कि अवैध लकड़ी की कटाई एक बड़ी चुनौती है जिसके चलते गिद्धों की संख्या प्रभावित होती है हालांकि गिद्ध ऊंचे वृक्ष और खड़ी पहाड़ियों पर अंडे देते हैंl जिसको लेकर वन विभाग अलर्ट है और लगातार कार्यवाही कर रहा है वनों की कटाई के चलते पूरा इकोसिस्टम प्रभावित होता हैlवन विभाग गिद्धों के पोषण और पुनर्वास के लिए लगातार प्रयासरत है l

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