विधानसभा में गूंजा आवारा कुत्तों का मुद्दा : विधायक ने जनसुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं पर दिया जोर

विधानसभा में गूंजा आवारा कुत्तों का मुद्दा : विधायक ने जनसुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं पर दिया जोर
सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने प्रदेश में गहराती आवारा कुत्तों की समस्या को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील द्वारा भोपाल की स्थिति पर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए विधायक जैन ने कहा कि यह केवल एक शहर का विषय नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश के शहरी क्षेत्रों में एक गंभीर संकट के रूप में उभर रहा है।
विधायक जैन ने सदन को अवगत कराया कि सागर समेत पूरे प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है, जिससे ‘डॉग बाइट’ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि कुत्तों द्वारा विषाक्त भोजन करने के कारण उनका व्यवहार असामान्य और आक्रामक हो जाता है, जो नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में हुई गंभीर बहस का भी उल्लेख किया।
स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग
विधायक जैन ने सुझाव दिया कि समस्या के समाधान हेतु प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉग बाइट की स्थिति में तत्काल उपचार मिलना पीड़ित की जान बचाने के लिए अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने नगरीय निकायों से नसबंदी अभियान को महज कागजों तक सीमित न रखकर प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने की अपेक्षा की।
पहली रोटी गाय और अंतिम स्वान को देने का संदेश
विधायक शैलेंद्र जैन ने समस्या के समाधान के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय पहलू को भी रेखांकित किया। उन्होंने सदन के माध्यम से समाज को संदेश देते हुए “पहली रोटी गाय को एवं अंतिम रोटी स्वान को देने” की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना से ही इस समस्या का संतुलित समाधान निकाला जा सकता है।
ठोस नीति बनाने की अपील
अंत में विधायक ने सरकार और स्थानीय निकायों से स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जन-जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विषय मानवीय संवेदनाओं और जनसुरक्षा दोनों से गहराई से जुड़ा है, अतः इसके लिए एक समन्वित प्रयास और ठोस सरकारी नीति की तत्काल आवश्यकता है।







