यश भारत (स्पेशल डेस्क)/ मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में जबलपुर के यश घनघोरिया ने प्रदेश अध्यक्ष पद पर सर्वाधिक मत हासिल करते हुए जीत हासिल करने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है।
उन्होंने प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्षबनकर न केवल संस्कारधानी का मान बढ़ाया है, बल्कि अपनी संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि से उन सभी आरोपों पर भी विराम लगा दिया है जो कांग्रेस पर परिवारवाद का ठप्पा लगाते रहे हैं। पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे होने के बावजूद, यश ने अपनी पहचान जमीनी कार्यकर्ता और आंदोलनकारी नेता के रूप में बनाई है।
संघर्ष की गाथा: परिवारवाद के तानों का करारा जवाब
भारत जोड़ो यात्रा में अग्रणी भूमिका
यश घनघोरिया की इस सफलता का आधार उनका सक्रिय जमीनी कार्य रहा है। वह राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई ऐतिहासिक भारत जोड़ो यात्रा में न केवल शामिल रहे, बल्कि मध्य प्रदेश में इस यात्रा को सफल बनाने में उन्होंने युवा कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका यह जुड़ाव स्पष्ट करता है कि शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में उनकी स्वीकार्यता उनकी योग्यता और समर्पण पर आधारित है।
युवा कांग्रेस के आंदोलनों में सक्रियता
युवा कांग्रेस के बैनर तले आयोजित हुए बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों से जुड़े हर बड़े आंदोलन में यश घनघोरिया की सक्रिय भागीदारी रही है। सड़कों पर उतरकर लाठी खाने और जेल जाने तक का अनुभव उनके पास है। यह दिखाता है कि उन्होंने पद विरासत में नहीं, बल्कि स्वयं के परिश्रम से अर्जित किया है।
चुनौतियों और नई दिशा
यश घनघोरिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भोपाल के अभिषेक परमार को भारी अंतर (3 लाख 13 हजार 730 वोट) से हराया। यह जीत एक मजबूत जनादेश को दर्शाती है और पार्टी के भीतर उनके संगठनात्मक कौशल को स्थापित करती है।
यश घनघोरिया की यह नियुक्ति कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसके माध्यम से पार्टी ने यह संदेश दिया है कि पार्टी में युवा ऊर्जा और जमीनी संघर्ष को प्राथमिकता दी जा रही है। यश घनघोरिया की व्यक्तिगत जीत अब पूरे प्रदेश के युवाओं की जीत में बदलने का काम करेगी।
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