यशभारत खास : ढाई हजार में महज 611 आवारा श्वानों का बधियाकरण, एक माह से गायब ठेकेदार, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया नोटिस नसबंदी की सुस्त चाल से हर दिन बढ़ रहा खतरा

कटनी, यशभारत। शहर में आवारा श्वानों की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है। आलम यह है कि शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर अंदरूनी गलियों में आवारा श्वानों की पूरी की पूरी टोली घूम रही है और लोगों पर हमला कर रही है लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। वैसे तो आवारा श्वानों के बधियाकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा नगर निगम को भारी भरकम बजट भी दिया जाता है लेकिन स्थिति यह है कि ढाई हजार में से अब तक केवल 611 कुत्तों का ही बधियाकरण हो पाया है। नगर निगम की सुस्त चाल से हर दिन न केवल खतरा बढ़ता जा रहा है, बल्कि आवारा श्वानों की समस्या भी बढ़ती जा रही है। नगर निगम आवारा कुत्तों को पकडऩे के लिए अभियान भी चला रहा है, लेकिन इसका नतीजा यह हो रहा है कि आवारा कुत्तों को पकडक़र जिस स्थान पर छोड़ा जा रहा है, वहां कुत्ते लोगों पर हमला कर रहे। इस तरह की घटनाएं पिछले कुछ दिनों में सामने आई है। वैसे कुत्तों को पकडक़र शहर से दूर स्थानों पर छोड़ा जाना है लेकिन नगर निगम के कर्मचारी कुत्तों को एक वार्ड से पकडक़र दूसरे वार्ड में छोड़ रहे। पशुपालन पालन विभाग द्वारा जारी आंकड़ो के मुताबिक शहर के 45 वार्डों में आवारा स्वानों की संख्या करीब 2 हजार 545 है। यानि हर वार्ड में आधा सैकड़ा कुत्ते मौजूद हैं। आलम यह है कि पिछले तीन महीने में नगर निगम महज 611 कुत्तों का ही बधिया करण कर पाया है। निगम के ही सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार पिछले एक माह से शहर से गायब है, जिसको स्वास्थ्य विभाग नोटिस भी जारी कर चुका है। शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, जिससे लोगों में दहशत फैल रही हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में डॉग बाइट की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे बच्चों और वयस्कों को खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी विकास बर्मन, सुनील यादव और राजा जगवानी ने बताया कि शाम होते ही आवारा कुत्तों का झुंड सडक़ों पर गाडिय़ों के पीछे भागता है, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ रही है।
फुस्स हो गया अभियान
नगर निगम ने पहले आवारा कुत्तों को पकडऩे का अभियान चलाया था, लेकिन अब वो फुस्स हो चला है। उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर, हाऊसिंग बोर्ड कालोनीए घण्टाघर, सराफा बाजार, आजाद चौक, बरगवां, चौपाटी, द्वारका सिटी, जिला चिकित्सालय परिसर सहित शहर की अन्य पॉश कालोनी में लोगों ने बेकाबू होते कुत्तों पर अंकुश लगाने के लिए निगमायुक्त तक गुहार लगाई हैं। नागरिकों ने मांग की है कि निगमायुक्त इस समस्या का समाधान करें और आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए ठोस रणनीति बनाएं।
मथुरा के ठेकेदार को दिया टेंडर
नगर निगम ने बीते नवंबर महीने में मथुरा के ठेकेदार को कुत्तों की नसबंदी का टेंडर दिया था, जिसके बाद कुत्तों के बधियाकरण की प्रक्रिया सुरम्य पार्क के पीछे बनाए गए अस्थाई कैम्प में की गई। सूत्रों का कहना है कि टैंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने की वजह से अन्य ठेका कंपनी ने इस प्रक्रिया में हिस्सा नही लिया। उनका कहना था कि टेंडर की शर्ते पारदर्शी नहीं हैं, जिससे प्रतीत होता है कि किसी विशेष संगठन को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
कागजो में खानापूर्ति…
सूत्र कहते है कि एक बड़ी खामी यह भी सामने आई है कि अब तक शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी का कार्य पूर्व में भी कागजों में किया गया। यही कारण था कि पिछले कई वर्षों में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। गली-मोहल्लों में बढ़ती संख्या के कारण लोगों को सुबह-शाम निकलना मुश्किल हो गया है। कई क्षेत्रों से कुत्तों के काटनेए झुंड बनाकर हमला करने और बच्चों को डराने की शिकायतें भी सामने आती रही।
सुप्रीमकोर्ट के ये निर्देश…
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़ी चिंताओं पर सख्त निर्देश जारी किए थे। अदालत ने नगर निकायों को स्पष्ट रूप से कहा था कि आवारा कुत्तों से आम नागरिकों के जीवन, सुरक्षा और स्वास्थ्य पर कोई खतरा नहीं होना चाहिए। परंतु इन निर्देशों के बावजूद शहर की स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है। शहर की गलियों और मोहल्लों में हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते मौजूद हैं, जो स्थानीय लोगों के लिए लगातार परेशानी का कारण बने हुए हैं। प्रदेश सरकार ने आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के प्रबंधन के लिए एसओपी जारी की है, जिसमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों के चारों ओर ऊंची बाउंड्रीवाल खड़ी करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा आवारा कुत्तों को पकडक़र गोशालाओं और शेल्टर होम्स में रखने की व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए गए है।





